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Updated on Dec 29, 2023education

भारत की सबसे ऊंची मीनार कौन सी है?

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Answered on Dec 28, 2023

चलिए भारत की सबसे ऊंची मीनार यानि की कुतुब मीनार के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

भारत की सबसे ऊंची मीनार है कुतुब मीनार :- मैं आपको बता दूं कि कुतुब मीनार भारत के दिल्ली शहर के महरौली में ईंट से बनी विश्व की सबसे ऊंची मीनारो में से एक है। इसी वजह से कुतुब मीनार भारत का सबसे प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। यह मीनार हिंदू मुगल इतिहास का एक बहुत खास हिस्सा है। कुतुब मीनार को यूनेस्को द्वारा भारत के सबसे पुराने वैश्विक धरोहर की सूची में भी शामिल किया गया है।

चलिए कुतुब मीनार से जुड़ी कुछ अन्य जानकारियां प्राप्त करते हैं:-

मैं आपको बता दूं की कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है। मोहाली के फ़तह बुर्ज के बाद भारत की सबसे बड़ी मीनार मे कुतुब मीनार का नाम आता है। कुतुब मीनार के अंदर 389 सीढ़ियां बनी हुई है जो की गोलाई आकार में बनी है।

चलिए कुतुब मीनार से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियां प्राप्त करते हैं।

  • मैं आपको बता दूं की कुतुब मीनार की सबसे खास बात यह है कि यहां परिसर में एक लोहे का खंभा लगा हुआ है। जिसको लगे हुए लगभग 2000 साल हो गए हैं लेकिन आज तक इस लोहे के खंभे में जंग नहीं लगी। भले ही कुतुब मीनार भारत की सबसे बड़ी इमारत है लेकिन यह बिल्कुल सीधी नहीं है थोड़ी सी झुकी हुई है।
  • जैसा कि आप सभी जानते हैं की कुतुब मीनार दुनिया की सबसे ऊंची इमारत में से एक है लेकिन यह दुनिया की ईटों से बनी हुई सबसे ऊंची इमारत में से एक है।
  • आपको यह बात जानकर हैरानी होगी की कुतुब मीनार का असली नाम विष्णु स्तंभ है। इसके साथ इसके सम्राट चंद्रगुप्त और विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक कहा गया है।
  • यहां पर मैंने आपको विश्व की सबसे ऊंची इमारत की जानकारी दे दी है।

Letsdiskuss

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Answered on Dec 28, 2023

आईए जानते हैं भारत की सबसे ऊंची मीनार कौन सी है। दिल्ली के आकाश को छूती कुतुब मीनार (240 फीट ऊंची) राजधानी की सबसे प्रतिष्ठित धरोहर में से एक है लेकिन अब यहां की एक अदालत में इस बात का फैसला होना है कि कई सदी पहले जिन मंदिरों को तोड़कर इसका परिसर बनाया गया, उन मंदिरों को फिर से जिंदा किया जाना चाहिए या नहीं। वर्तमान में यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल में शामिल कुतुब मीनार का निर्माण दिल्ली सल्तनत के पहले शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा करवाया गया था। माना जाता है कि गुलाम वंश के संस्थापक ऐबक ने जब 1192 में हिंदू राजाओं को हराया तब उस जीत को यादगार बनाए रखने के लिए इस मीनार को बनाने का फैसला किया गया।

अफगानिस्तान की मीनार कला से प्रभावित यह मीनार लाल और बादामी रंग के बलुआ पत्थर से बनाई गई है। मुस्लिम शासको द्वारा बनाई गई यह कुछ शुरुआती इमारतों में से एक है। कुतुबुद्दीन ऐबक के बाद के तीन सुल्तानों ने इसकी मरम्मत की और इसे और ऊंचा किया। फिलहाल कुतुब मीनार में 5 मंजिलें हैं और ऊपर तक जाने के लिए 379 सीढ़ियां है। इतिहासकार विलियम डेल रिंपल के अनुसार कुतुब मीनार दिल्ली में अरावली की पहाड़ियों के बीच पर खड़ा विशाल दूरबीन की तरह है। जो विजेता कि शान और उसकी जीत का प्रतीक है।

कुतुब मीनार परिसर का विविध इतिहास रहा है। दावा किया जाता है कि यहां कभी 27 हिंदू और जैन मंदिर थे जिन्हें तोड़कर उनके मलबे से वहीं पर दिल्ली की पहली मस्जिद बनाई गई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधिकारी जे ए पेज ने 1926 मे एक नोट में बताया कि उनमें से एक मंदिर की नीव को न केवल रखा गया बल्कि उसका विस्तार भी किया गया ताकि मस्जिद खड़ी हो सके।

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