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Himani Saini· 2 years ago
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कौन थे मुनव्वर राणा ? उनके लिखे 20 मशहूर शेर कौन से है?

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Answered on01/20/24

कौन थे मुनव्वर राणा? उनके 20 मशहूर शेर कौन से हैं?

दोस्तों अपनी लेखनी से पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाले मुनव्वर राणा किसी पहचान की मोहताज नहीं है।

बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना,
आप आसान समझते हैं मुनव्वर होना।।

शेरो शायरी से ताल्लुक रखने वाले मुनव्वर राणा उर्दू शायर के रूप में पूरे देश में प्रसिद्ध है। उनकी लिखी शायरी हर किसी के जुबान पर होती है। मुनव्वर राणा का जन्म 26 नवंबर 1992 को रायबरेली के जिले में हुआ था जो कि उत्तर प्रदेश में स्थित है। हालांकि वह अपने जीवन के अंतिम दिनों में लखनऊ में रह रहे थे। इससे पहले उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय कोलकाता में बिताया था। मुनव्वर राणा भले ही एक उर्दू शायर थे पर उन्हें अपनी शायरी में हिंदी और अवधि शब्दों के प्रयोग पर अधिक जोर दिया। जिसके कारण से देश में उनकी प्रसिद्धि बढ़ती चली गई।

मुनव्वर राणा की लोकप्रियता के कारण ही 2014 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था। यह साहित्य अकादमी पुरस्कार उन्हें उनकी रचना "शाहदाबा" के लिए दी गई थी जो की उर्दू भाषा में लिखी गई है। इसके अलावा उर्दू साहित्य में अपनी लेखनी के जरिए सहयोग देने के लिए 2012 में मुनव्वर राणा को "माटी रत्न सम्मान" से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान "शहीद शोध संस्थान" की ओर से मुनव्वर राणा को सौंप गई थी।

जानकारी के लिए बता दे की 14 जनवरी 2024 को मुनव्वर राणा का निधन लखनऊ के एक अस्पताल में हुआ। उन्हें गले के कैंसर की शिकायत थी। जिसके कारण 71 वर्ष की आयु में ही मुनव्वर राणा इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गए। उन्हें ऐशबाग कब्रिस्तान में दफनाया गया तथा उनके जनाजे में अखिलेश यादव और जावेद अख्तर जी भी शामिल हुए थे। इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने भी मुनव्वर राणा के निधन पर शोक जताया तथा कुमार विश्वास ने भी उनके तमाम यादों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया कि उनके जीवन के आख़री दशक में उनसे गंभीर मतभेद रहे किंतु, कवि-सम्मेलनीय यात्रा के शुरुआती दौर में मंचों पर उनके साथ काफ़ी वक्त बीता। इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भी कई नामी हस्तियों ने मुनव्वर राणा के निधन पर शोक जताते हुए उनके साथ बिताए गए समय को याद किया। वही बरेलवी साहब ने मुनव्वर राणा को के निधन पर सबसे पहली प्रतिक्रिया दी तथा उनके साथ बिताए गए समय को याद करते हुए लिखा कि,

वो मुझे छोड़कर यूं आगे बढ़ा जाता है,
जैसे अब मेरा सफर खत्म हुआ जाता है।।

हालांकि मुनव्वर राणा अपने जीवन काल में काफी विवादों से घिरे रहे । उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर पर फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश रंजन गोगोई पर उनके फैसले के लिए उन पर खुद को बेचने का आरोप लगाया तथा कहां की यह कोई फैसला नहीं बल्कि आदेश है। जिसके कारण उन्हें काफी विवादों का सामना करना पड़ा। इसके पहले भी 2020 में उन्होंने एक चैनल पर इंटरव्यू के दौरान महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान के आतंकवादियों से की थी। उनका कहना था कि महर्षि वाल्मीकि रामायण लिखने के बाद से भगवान बन गए। उसके पहले वह एक डाकू थे अर्थात् किसी भी इंसान का चरित्र बदल जा सकता है। इसी तरह तालिबान के आतंकवादी भी कभी भी अपना चरित्र बदल सकते हैं। उन्होने तालिबान को आतंकवादी संगठन के रूप में मानने से इनकार कर दिया था। जिसके कारण भी उन्हें काफी विवादों का सामना करना पड़ा। हालांकि वह कभी भी किसी एक धर्म के साथ खड़े नहीं रहे। उन्हें सभी धर्म से खास लगाव था। अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपी को गलत साबित करते हुए उन्होंने लिखा कि,

1) एक आंगन में दो आंगन हो जाते हैं
मत पूछा कर किस कारण हो जाते हैं,
राम की बस्ती में जब-जब दंगा होता है
हिन्दू-मुस्लिम सब रावण हो जाते हैं।।

2) मदीने तक में हमने मुल्क की खातिर दुआ मांगी
किसी से पूछ लो, इसको वतन का दर्द कहते है।।

इसके अलावा उन्होंने धर्म के नाम पर चल रही सियासत का विरोध करते हुए लिखा कि,

3) बस इतनी बात पर उसने हमें बलवाई लिक्खा है, हमारे घर के बरतन पे आई.एस.आई लिक्खा है।।

4)अगर दंगाइयों पर तेरा कोई बस नहीं चलता,तो फिर सुन ले हुकूमत, हम तुझे नामर्द कहते हैं।।

मुनव्वर राणा को अपनी माँ से अत्यधिक लगाव था। माँ के प्रति उनका प्रेम उनकी लिखी शायरी में साफ तौर पर देखने को मिलती है।

5) किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई।।

6) यहाँ से जाने वाला लौट कर कोई नहीं आया
मैं रोता रह गया लेकिन न वापस जा के माँ आई।।

7) अभी ज़िंदा है मां मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूं दुआ भी साथ चलती है।।

8) इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है।।

9) उदास रहने को अच्छा नहीं बताता है,
कोई भी जहर को मीठा नहीं बताता है
कल अपने आपको देखा था मां की आंखों में,
ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है।।

10) “मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना”।।

11) ऐ अँधेरे! देख ले मुँह तेरा काला हो गया
माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया”।।

12) मुनव्वर मां के आगे यूं कभी खुल कर नहीं रोना
जहां बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती।।

13) मुख़्तसर होते हुए भी ज़िंदगी बढ़ जाएगी
माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी।।

उन्होंने देश के मजदूरों की स्थिति को बयां करते हुए लिखा कि,

14) सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर
मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाते।।

15) बच्चे भी ग़रीबी को समझने लगे शायद
अब जाग भी जाते हैं तो सहरी नहीं खाते।।

मुनव्वर राणा ने अपने अपनी शायरी में उदासी को भी बड़े ही खूबसूरती से बयान करते हुए लिखा है कि,

16) उस के उदास होंट पत्थर के हो गए थे
और पत्थर मुस्कुरा नहीं सकते।।

17) तुम से नहीं मिलने का इरादा तो है लेकिन
तुम से न मिलेंगे ये क़सम भी नहीं खाते।।

18) इक बोसीदा मस्जिद में दीवारों मेहराबों पर
और कभी छत की जानिब, मेरी आँखें घूम रही हैं


जाने किस को ढूढ़ रही हैं,

अपने जीवन के आखिरी समय में उन्होंने अपनी तबीयत की जानकारी पूरी दुनिया को देते हुए यह लिखा कि,

19) मेरी मुठ्ठी से ये बालू सरक जाने को कहती है,
कि अब ये ज़िंदगी मुझसे भी थक जाने को कहती है।।

20) ऐसे उडूं कि जाल न आए खुदा करे,
रस्ते में अस्पताल न आए खुदा करे।।

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