दोस्तों शाहजहां को कौन नहीं जानता जब भी शाहजहां का नाम लेते हैं तो ताजमहल की याद आ जाती है क्योंकि शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था लेकिन क्या आप जानते हैं कि शाहजहां की अर्थी को किन्नरों और नौकरों ने कंधा क्यों दिया था नहीं जानती होंगी तो आज हम आपको यहां पर इसकी जानकारी देंगे दोस्तों शाहजहां के 7 पुत्र थे जिनमें से उनके तीन पुत्रों की मृत्यु पहले हो चुकी थी और 4 पुत्र बचे थे लेकिन आपसी मतभेद होने की वजह से उनके पुत्रों ने उन्हें मरने के बाद कंधा नहीं दिया था इसलिए आसपास के किन्नर और नौकरों ने शाहजहां की अर्थी को कंधा दिया था।

शाहजहां की अर्थी को किन्नरों ने कंधा क्यों दिया था?
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शाहजहां वह राजा थे। जिन्होंने अपने प्यार के लिए ताजमहल बनवाया था। लेकिन शाहजहां के पुत्र होने के बाद भी उनके अर्थी को कंधा नहीं मिला। ऐसा माना जाता है कि शाहजहां के 7 पुत्र थे जिनमें से 3 की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी और चार पुत्रों की शाहजहां से लड़ाई होने के बाद उन्होंने अपने पिता की अर्थी को कंधा देने से मना कर दिया था । जिसके कारण शाहजहां की अर्थी की कंधा कुछ किन्नरों को देना पड़ा था। 
शाहजहाँ और औरंगजेब के बीच मतभेद की वजह से औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहाँ की अर्थी को कंधा नही दिया था। शाहजहाँ के 7 पुत्रो मे से 3 की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी और बाकी के चार पुत्रो से शाहजहाँ का आपसी मतभेद था जिसकी वजह से किसी ने भी पिता के मरने के बाद उसकी अर्थी को कंधा नही दिया। शाहजहाँ को उसके आस पास के किन्नरो और नौकरो ने कंधा दिया था।

दोस्तों शाहजहां को कौन नहीं जानता है अगर बात ताजमहल की आती है तो लोग शाहजहां की मोहब्बत की किस्से सुनाते हैंशाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज के लिए ताजमहल बनवाया था जो आज दुनिया के सात अजूबों में से एक है । लेकिन आज हम इस पोस्ट में आपको बताएंगे कि शाहजहां की अर्थी को किन्नर ने कंधा क्यों दिया था। दरअसल जब शाहजहां की मृत्यु हुई थी तो उनके बेटों ने अर्थी को कंधा नहीं दिया था। इसीलिए शाहजहां की अर्थी को कंधा उनके नौकरों और किन्नरों ने दिया था।



