प्रवासी मजदूरों को उनके राज्य में भेजने के लिए सरकार ने इतनी देरी क्यों की ? - letsdiskuss
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LLB student | पोस्ट किया |


प्रवासी मजदूरों को उनके राज्य में भेजने के लिए सरकार ने इतनी देरी क्यों की ?


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देश  की मौजूदा सरकार के पास किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुविधाएं ना अब मौजूद थी और ना ही 2014 में. क्रोना वायरस से पहले देश में वैसे भी भुखमरी गरीबी बेरोजगारी दिनों दिन गिरती अर्थव्यवस्था इन सभी समस्याएं अपने चरम पर पहुंच चुकी थी जब पहले ही देश को अंदर से खोखला बना दिया था तो यह सरकार क्या खाक ऐसे मुश्किल स्थिति में प्रवासी मजदूरों की मदद करती. यह तो सोचा भी नहीं जा सकता है.


एक समय था जब देश में 500 के आसपास कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या होती है और आज का समय हैमरीजों की संख्या 70,000 से भी पार हो जाती है. और अब हमारे रणनीतिकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रवासी लोगों के लिए ट्रेनों की सुविधाओं को उपलब्ध करवा रहे हैं. इस नासमझी की वजह से गांव-गांव तक क्रोना वायरस पहुंच रहा है बिहार में वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 700 से पार पहुंच चुकी है. जबकि प्रवासी लोगों के अपने राज्य में आने से पहले इतने मरीजों की संख्या नहीं थी. ऐसा भी कह सकते हैं कि बीजेपी सरकार के पास लोग डॉन को लेकर कोई रणनीति नहीं थी जिस वजह से लोगों को वायरस की वजह से तो दिख तो का सामना करना ही पड़ा भूखे रहने की वजह से भी कई लोग मर गए कई लोग इस समस्या से जूझने की वजह से पैदल अपने गांव क्यों लौट रहे हैं रास्ते में ट्रेन की चपेट में आकर 16 मजदूर की मौत हो जाती है. एक कंटेनर पलट जाता है जिसमें 5 लोगों की मौत हो जाती है यह सब सही रणनीति नहीं है तभी तो लोगों की मौत बेवजह हो रही है जिसका कोई मतलब ही नहीं है.


नोटबंदी की वजह से अभी आमजन लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है इसका भी मुख्य का नियम होता है कि हमारी सरकार के पास कोई रणनीति नहीं होती है जिस वजह से लोग तमाम परेशानियों का सामना  अपना काम-धाम छोड़ कर लाइन में सुबह शाम खड़े रहते हैं.

आखिर  हमारे प्रधानमंत्री की कैसी रणनीति है जब 500 के आसपास मरीजों की संख्या थी  तब ही प्रवासी मजदूरों को अपने अपने घर लौट जाने  का आदेश दे सकते थे  मगर इन्होंने  मरीजों की संख्या बढ़ने तक का इंतजार किया और अब लोगों को भेज रहे हैं इस बात से साफ जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास किसी भी तरह की कोई रणनीति नहीं है क्रोना वायरस  से निपटने के लिए  और ना ही अचूक रणनीति है जिससे प्रवासी लोगों को दिनोंदिन जो तकलीफ पैदा हो रही है इससे बचाव हो सके.

ऐसा भी कहा जा सकता है कि सरकार लोगों को ना भोजन उपलब्ध करवा रही थी और ना ही उनका किराया माफ करवा रही है प्रवासी लोगों को आर्थिक मदद भी नहीं की जा रही है जिस वजह से सरकार ने अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए कोरोना वायरस के 70000 मरीज होने के बाद लोगों को घर भेजने की तैयारी अब कर रही है.
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