हम सभी यह सोचते है के नहाने से शरीर साफ होता है। शरीर में से दुर्गंध नही आती। लेकिन मछली तो हमेशा पानी में रहती हैं फिर उसमे से क्यु दुर्गंध आती हैं?
आइये आज इस दिलचस्प प्रश्न का जवाब जानते है। जो भी जानवर पानी में रहते है उनके अन्दरट्राइमेथिलैमाइन एन ऑक्साइड नाम का रसायन पाया जाता है। जिससे उन्हे पानी के अंदर सांस लेने और जीवित रहने के लिए मदद मिलती है और इस रसायन के कारण उनकी कोशिकाएँ खत्म नही होती।
पानी के बाहर रहने वाले जीवो और मनुष्यों में यह रसायन नही पाया जाता । इसलिए जब भी वह समुद्र या तालाब में जाते है तो साँस लेने के पर्याप्त सामाग्री होने के बावजूद वह मर जाते है।
जब तक मछलियाँ तालाब या समुद्र में होती हैं और जीवित होती है उनसे कोई दुर्गंध नही आती लेकिन जैसे ही उन्हे तालाब से बाहर निकाला जाता है उनसे तेज दुर्गंध आने लगती है।इसका कारण मछलियों के अंदर पाया जाने वाला रसायन ट्राइमेथिलैमाइन एन ऑक्साइड बदल करट्राइमेथिलमाइनहो जाता है।
इसी कारण पानी के बाहर आते ही मछली के मर जाने के बाद उसमे इतनी दुर्गंध आती है। जितनी ताजी मछली होती हैं उसमे उतनी ज्यादा बदबु आती हैं। और जितनी पुरानी मछली होती हैं उसमे वक्त के साथ यह दुर्गंध कम हो जाती हैं। बाजारो में भी ताजी और बासी के आधार पर मछलियाँ बेची जाती हैं।
दुनिया में लगभग मछलियों की 28,500 से भी ज्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं। मछलियों में ओमेगा 3 ,विटामिन बी,ए, सी और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है । इसके अलावा आयरन कैल्शियम, पोटेशियम ,फास्फोरस ,सोडियम , सेलेनियम भी पाया जाता हैं। इतने गुणों से भरपूर होने के कारण लोग मछली खाना ज्यादा पसंद करते है।
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