➡सबसे पहले यह की पुराने चावल बनाते वक्त बहुत ही सुगंधित होते हैं। इस विषय में आपको यह भी बताना चाहूंगी कि हमारे घर में चावलों की विभिन्न प्रकार की वैरायटियों जो मार्केट में उपलब्ध है का आए दिन इस्तेमाल होता है। परंतु जब भी वह हमारे घर आते हैं अपने घर के चावल जरूर ले कर आते हैं। यह चावल हम जब भी अपने घर में बनाते हैं आप मानेंगे नहीं परन्तु इनकी सुगंध आसपास के पूरे वातावरण में मानों फूलों जैसे फ़ैल जाती है। (बाहर से जा रहे लोग भी हमारे घर आकर पूछते हैं *क्या बनाया है भाई! और जब भी हम उन्हें बताते हैं कि चावल बनाए गए हैं तब वह इस बात से हैरान होते हैं कि इतनी सुगंधित चावल :-(( यह इतने सुगंधित होते हैं कि बाज़ार में मिलने वाली सारी वैराइटीज इसके आगे कुछ नहीं है।
➡दूसरी बात की नई चावल पकने के बाद बहुत ही चिप-चिपे बनते है और इनका उपयोग मुख्यता भारतीय व्यंजनों में खीर,(क्योंकि इसमें चावलों का दूध में पूरी तरह से मिल जाना इसे और भी अधिक स्वादिष्ट बनाता है), गुड़ में बने मीठे चावल आदि बनाने के लिए किया जाता है।
➡ भारत में पुराने चावल मुख्यता दालों के साथ खाने के लिए बनाए जाते हैं क्योंकि यह अधिक फूले और बिखरे हुए बनते हैं।
➡ पुराने चावल बनाने पर ज़्यादा फूलते जबकि नए चावल इतना नहीं। पुरानी चावल अपने लिए हुए नाप से दुगने बनते हैं और इनकी लम्बाई भी नए चावलों से अधिक होती है।
➡ पुरानी चावल पकने पर बहुत ही स्वादिष्ट बनते हैं जबकि नए चावलों इतने स्वादिष्ट नहीं होते।
इन्हीं कारणों की वजह से पुराने चावलों को खरीदने का अधिक महत्व है।

