मंदिर केअन्दर जाने से पहले घंटी क्यों बजाई जाती है?
हिन्दू धर्म में अक्सर ऐसा होता है कि कोई भी पूजा शुरू करना हो तो उससे पहले शंख और घंटी बजाई जाती है| जब हम मंदिर जाते हैं उस वक़्त भी घंटी बजाते हुए ही मंदिर में प्रवेश करते हैं| हम ये तो जानते हैं कि मंदिरों में घंटी लगी होती है जिसको बजाते हुए ही हम मंदिर में प्रवेश करते हैं पर क्या हम यह जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
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आज हम आपको बताते हैं कि मंदिर के अन्दर जाने से पहले घंटी क्यों बजाई जाती है|
सबसे पहले हम इस बारे में आपको बताते हैं कि मंदिर की घंटियाँ कितने प्रकार की मानी गई है:
मंदिर में घंटियों के प्रकार को चार भागों में बांटा गया है-
1. गरूड़ घंटी,
2. द्वार घंटी,
3. हाथ घंटी,
4. घंटा
गरूड़ घंटी :
गरूड़ घंटी छोटी-सी होती है जिसको सामन्यतः घर में रखा जाता है और जिसको आसानी से हाथ से बजाया जा सकता है।
द्वार घंटी :
यह घंटी द्वार पर लटकी होती है और अगर इसके आकार की बात करें तो यह बड़ी और छोटी दोनों हो सकती है|
हाथ घंटी :
यह पीतल की ठोस एक गोल प्लेट जैसी होती है जिसको लकड़ी के एक गट्टे से थोक कर बजाय जाता है|
घंटा :
यह बहुत बड़ा होता है, इसका अकार कम से कम 5 फुट लंबा और चौड़ा| इसको बजाने की आवाज कई दूर तक सुने दित है|
मंदिर में घंटी बजाने के धार्मिक कारण देखा जाए तो इसकी ध्वनि आस-पास की नकारात्मक चीजों को हटा देती है| जिन स्थानों पर घंटी बजने की आवाज रोजाना आती है वहाँ का वातावरण शुद्ध होता है|
घंटी बजाने का धार्मिक कारण:
पहला- घंटी बजाने से देवी-देवताओं के सामने आपकी हाजिरी लग जाती है| मान्यता कहती है कि जब हम घंटी बजाकर मंदिर के प्रवेश करते हैं तो इससे मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है और जब हम पूजन करते हैं तो उसका फल अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है|
दूसरा- घंटी की मनमोहक ध्वनि मन और मस्तिष्क को अध्यात्म भाव की तरफ ली जाती है और जो भगवान के प्रति और अधिक आस्था का प्रतीक होती है| मंदिर में घंटी बजाने से मनुष्य के पापों का नाश हो जाता है|
तीसरा – घंटी की आवाज सुनकर मन भगवान के प्रति इतना मोहित हो जाता है कि हमें भगवान की साक्षात् छवि दिखाई देने लगती है|
आपको एक और खास बात बता दें कि घंटी बजाने के सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक कारण भी है | वैज्ञानिकों का कहना है कि जब भी मंदिर में घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में एक कंपन पैदा होता है, जो काफी दूर तक जाती है| इस कंपन की वजह से क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव जो वातावरण को खराब कर सकते हैं सब खत्म हो जाते हैं|
तो यह है मंदिर में घंटी बजाने के धार्मिक और वैज्ञानिक कारण|
आज हम आपको बताते हैं कि जब भी हम मंदिर के अंदर जाते हैं तो सबसे पहले प्रवेश द्वार पर पहुंच कर घंटी बजाते हैं क्योंकि घंटी बजाने से ऐसा माना जाता है कि देवता जागृत होते हैं और आपकी प्रार्थना सुनते हैं और घंटी बजाने से देवताओं के सामने आपकी हाजिरी लग जाती है।
घंटे की ध्वनि मनमोहक और कर्णप्रिय होती है मन घंटी की आवाज सुनकर शांति का अनुभव करता है घंटी बजाने से मनुष्य के कई जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा होती है तो एक लय और विशेष धुन से घंटियां बजाई जाती हैं।
सुबह-शाम मंदिरों में जब पूजा-आरती के लिए मंदिर के अंदर जाते है तो एक विशेष लय और धुन के साथ छोटी-बड़ी घंटियां बजाई जाती हैं। मान्यता है कि घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है, जिसके बाद उनकी पूजा और आराधना करने से अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाते है।
पुराणों के अनुसार, मंदिर में घंटी बजाने से इंसान के कई जन्मों के पाप दूर हो जाते है, कई लोग कहते हैं कि जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ, तब जो नाद (आवाज) गूंजी थी, वही आवाज घंटी बजाने पर भी आती है। घंटी उसी नाद का प्रतीक माना जाता है।

हमारे हिंदू धर्म में शंख, घड़ियाल, घंटी बजाने का बहुत ही महत्व होता है। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि मंदिर के अंदर जाने से पहले घंटी बजानेसे उसमंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत उत्पन्न होती है।जिसके बाद अगर कोई व्यक्ति उनकी पूजा और आराधना करता हैैैै तो उन्हें उनकी पूजा अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है। घंटी बजाने से व्यक्ति को उसकी ध्वनि भगवान के प्रति जोड़ती है। इसके आलावा घंटी की ध्वनि मन-मस्तिष्क को अध्यात्म भाव की ओर ले जाने का कार्य रखती है।
दोस्तों आप जब कभी भी मंदिर गए होंगे तो आपने देखा होगा कि मंदिर के अंदर जाने से पहले घंटी बजाई जाती है। तो मंदिर के अंदर जाने के पहले घंटी क्यों बचाई जाती हैं चलिए हम आपको यह पोस्ट में बताएंगे जब घंटी बजती है तो मंदिर के आसपास एक अलग सा वातावरण छा जाता है वहां आसपास जो भी नकारात्मक ऊर्जा रहती है वह सब नष्ट हो जाती है और वहां एक शुद्ध वातावरण हो जाता है ऐसा भी कहा जाता है कि जब घंटी बजाई जाती है उसे देवी देवता प्रसन्न होते हैं इसीलिए आरती के दौरान घंटियां बजाई जाती हैं।






