आप हमेशा से देखते आये होंगे कि किन्नरों की शवयात्रा कभी भी दिन के समय नहीं निकाली जाती है,हमेशा रात को ही किन्नरो की शवयात्रा निकालते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योकि किसी गैर किन्नर ने किन्नर का शव देख लिया तो वह दिवंगत किन्नर दूसरे जन्म में फिर से किन्नर के रूप मे ही जन्म लेगा, इसलिए रात के समय ही हमेशा किन्नरो की शव यात्रा निकाली जाती है। 
रात के समय ही क्यो निकाली जाती हैं किन्नरो की शव यात्रा?
@setukushwaha4049 | Posted on December 16, 2022
किन्नरों की अर्थी रात में इसीलिए निकाली जाती है। क्योंकि, जो अन्य किन्नर होती है वह अर्थी को ना देख सके नहीं तो वह अगले जन्म भी किन्नर होकर ही पैदा लेंगी। हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार किन्नरों की अर्थी देखना अशुभ माना जाता है। इसीलिए उन्हें रात के समय ही संमसान ले जाया जाता है। जिसके कारण वह अगले जन्म में किन्नर नहीं बल्कि एक समान व्यक्ति के जैसा ही जन्म ले। हमारे समाज में किन्नरों को कुछ लोग बहुत ही अलग नजरिए से देखते हैं। लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि, उनका भी जीवन होता है जिसे वह अच्छे से जीना चाहते हैं।
क्या आपने कभी किन्नरों की शव यात्रा देखी है नहीं देखी होगी क्योंकि किन्नरों की शव यात्रा दिन के समय पर नहीं निकाली जाती बल्कि इनकी शव यात्रा रात के समय निकाली जाती है चलिए इसके पीछे का कारण जानते हैं दरअसल ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि हमारे हिंदू धर्म में किन्नरों की शव यात्रा देखना अशुभ माना जाता है। और ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अगले जन्म में उन्हें फिर से किन्नर के रूप में पैदा ना होना पड़े इसलिए इनके सब को रात के समय श्मशान घाट में ले जाकर दफना दिया जाता है और किन्नरों के मरने पर कोई भी किन्नर दुखी नहीं होता है बल्कि यह लोग खुशियां मनाते हैं और भगवान से दुआ करते हैं कि उन्हें अगले जन्म में एक सामान्य मनुष्य के रूप में पैदा किया जाए। और सबसे खास बात तो यह है कि किन्नरों के शव को चप्पल से पीटा जाता है।





