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Updated on May 21, 2026news-current-topics

इंसान की इंसानियत क्यों ख़त्म होती जा रही है ,क्या कारण है की अब किसी मे इंसानियत नहीं बची ?

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4 Answers

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Updated on May 21, 2026

वर्तमान इंसान तब शर्म सार होता है जब कुछ गलत होते हुए भी लोग अपना मुँह फेर लेते है | और आधुनिक समय मे तो लोग गलत होते हुए फोटो लेंगे ,वीडियो बनाएगे ,सेल्फी लेंगे पर उस गलत काम को कोई रोकने की कोशिश नहीं करेगा | या उसका विरोध नहीं करेगा | ऐसा क्यों ?

आज का वर्तमान समाज इतना आधुनिक है के सभी के पास मोबाइल सुविधा उपलब्ध है,पर क्या हम इसका सही प्रयोग करते है |

मोबाइल का प्रयोग करने वाले उसका गलत प्रयोग जरूर करे पर सही नहीं कर सकता कोई क्योकि लोग सोचते है हम किसी के बीच मे क्यों आए ,हमारा कुछ नहीं जा रहा ,हमारा काम नहीं है ये , मगर उसकी वीडियो ,फोटो या सेल्फी लेने की बात होगी तो लोग ये काम पहले करेंगे | बस यही बाते है जो इंसान की इंसानियत को शर्म शार करती है |

जैसा की एक शर्मसार कर देने वाला वाक्या केरल का सामने आया है | इस हुए हादसे से पूरा समाज और सियासत शर्मिंदा होना चाहिए | एक 27 वर्ष के आदिवासी युवक को लोगो ने पीट-पीट कर मार दिया | मामला केरल के पलक्कड़ जिले का है | जहाँ आदिवासी युवक पर चोरी का इलज़ाम था और उसको देख कर लग रहा था वो बहुत दिनों से भूखा होगा | लोगो ने उसके हाथ पैर बाँध दिए और उसको पीट-पीट कर मार डाला और बहुत से लोग बस देखते रहे और कुछ लोग सेल्फी लेते है | क्या ये सही है ?

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ABOUT THE AUTHORKanchan Sharma

हिंदी लेखक

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Reporting what matters — with 12 years of ground-level journalism behind every s...
Answered on May 13, 2026

ऐसा पूरी तरह सही नहीं है कि इंसानियत खत्म हो गई है, लेकिन लोगों को आजकल selfishness और emotional disconnect ज्यादा दिखाई देता है। Fast lifestyle, stress, competition और social media comparison की वजह से लोग अपने struggles में इतने उलझ जाते हैं कि दूसरों की feelings और problems पर कम ध्यान दे पाते हैं। पहले लोगों के बीच personal connection ज्यादा होता था, जबकि अब online interaction बढ़ गया है।

News और internet पर negative घटनाएं ज्यादा viral होती हैं इसलिए भी लगता है कि humanity कम हो रही है। लेकिन honestly आज भी बहुत लोग जरूरत पड़ने पर मदद करते हैं, donations करते हैं और strangers तक की help करते हैं। शायद इंसानियत खत्म नहीं हुई, बस पहले जैसी easily दिखाई कम देती है।

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ABOUT THE AUTHORPari Deshmukh

Pari Deshmukh is a journalist with over 12 years of experience covering current affairs across print and digital media in India. She holds a Master's degree in Journalism and Mass Communication from Pune University, bringing both academic grounding and extensive field experience to her reporting. Over her career, Pari has reported on national politics, policy developments, social issues, and breaking news events across India. Her work has appeared on platforms including The Print, Scroll.in, and Hindustan Times Digital, where she has built a reputation for factual, balanced, and timely reporting on stories that shape public discourse. With 12+ years in the field, she has covered major national events, conducted ground-level investigations, and interviewed policymakers, civil society leaders, and public figures. Her journalism is driven by one standard — verified facts reported without distortion, regardless of the pressure or pace of the news cycle. She has participated in press panels at the Ramnath Goenka Excellence in Journalism Awards and is a member of the Press Club of India. Her reporting continues to serve readers who need current affairs coverage they can trust.

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Answered on Jun 7, 2023

वर्तमान समय में इंसान की इंसानियत पूरी तरह से खत्म होती जा रही है इंसानियत खत्म होने का मुख्य कारण है लोगों के पास इतना समय ही नहीं है कि वह किसी की मदद कर सकें क्योंकि आज के समय में लोग अपने कामों में इतना अधिक व्यस्त है कि उनके पास खुद के लिए समय नहीं है तो दूसरों के लिए क्या समय मिलेगा, कहते हैं ना कि सच्चा इंसान भी कहलाता है जो दूसरों की मदद करता है लेकिन अब ऐसा कुछ रहा ही नहीं आपको वर्तमान समय में ऐसे बहुत ही कम लोग मिलेंगे जो दूसरों की मदद करते होंगे।

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Answered on Jun 6, 2023

आज कल के भगादौड़ी जीवन मे लोगो के पास समय नहीं है वह सोचते है कि जितना ज्यादा काम करेंगे उतना ज्यादा उन्हें पैसा मिलेगा इसलिए वह किसी जरुरमंद इंसान की मदद नहीं करना चाहते है क्योकि उन्हें लगता है कि समय की बर्बादी होंगी इसलिए इंसान के अंदर पूरी तरह से इंसनियत खत्म होती जा रही है, यदि इंसान, इंसान की परेशानी समझे और एक -दूसरे की मदद करे तो सभी का जीवन सरल हो जाएगा लेकिन आज के समय इंसानों के अंदर इंसानियत नहीं बची वह किसी की कोई मदद नहीं करना चाहते है।

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ABOUT THE AUTHORSetu Kushwaha

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