नोबल प्राइज एक ऐसा प्राइज है की जो दुनिया में हर किसीका सपना होता है। यह प्राइज भौतिक विज्ञान, रसायन शास्त्र, चिकित्सा, शांति और साहित्य के लिए दिया जाता है। सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह है की इन विषयो में गणित का नाम शामिल नहीं है। अल्फ्रेड नोबल की जो इस प्राइज के फाउंडर है उनकी चाह थी की ख़ास क्षेत्रो में प्राइज दिया जाए पर उनके मुताबिक़ गणित कोई ऐसा विषय नहीं की जो मानवता को एक कदम आगे की और ले जाए।
सौजन्य: जागरण जोश
इस प्राइज का मुख्य उद्देश्य जिन्होंने मानवता की और कुछ अच्छा किया है उन्हें दुनिया के सामने रखने का है। इस व्याख्या में गणित कहीं पर फिट नहीं बैठ रहा और इसीलिए गणित के क्षेत्र में कार्य करनेवालों को नोबल प्राइज नहीं दिया जाता। एक और बात यह भी है की इस विषय के लिए उस समय पहले से एक पुरस्कार मौजूद था। इस के अलावा ऐसा भी माना जाता है की जिस वकत अल्फ्रेड नोबल ने इस पुरस्कार का ऐलान किया था उस दौर में उनकी काफी गणितशास्त्रियो से हरीफाई चलती थी और उनको इस पुरस्कार से वंचित रखने के लिए ही नोबल में गणित को समाविष्ट नहीं किया गया था। हालांकि इस बात के कोई प्रमाण प्राप्य नहीं है।