जयपुर और दिल्ली का जंतर मंतर दोनों ही खगोलीय वेधशालाएं हैं। वेधशाला का प्राथमिक उद्देश्य खगोलीय तालिकाओं को संकलित करना और सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों के समय और चाल की भविष्यवाणी करना था। आजकल इन उद्देश्यों में से कुछ को खगोल विज्ञान के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
