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Sks Jain· 4 साल पहले
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संसार की उत्पत्ति कैसे हुई ?

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अपडेट किया गया12/24/25

धार्मिक पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने पुरे संसार की ररचना किये थे,लेकिन वेदों और विष्णुपुराण में वर्णित के कहानी के अनुसार सभी जीव, जंतुओं की उत्पत्ति कश्यप नाम के एक ऋषि द्वारा हुयी थी। कश्यप ऋषि को सप्तऋषियों में से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रजापति दक्ष ने अपनी 13 पुत्रियों का विवाह कश्यप ऋषि के साथ कर दिया था, उनकी पुत्रीयो के नाम इस प्रकार -दानु,अरिश्ता, सुरसा, सुरभि, विनाता, अदिति, दिति, कदरु, तामरा, क्रोधवशा, इदा, विश्वा तथा मुनि थी। ऐसा माना जाता है कश्यप ऋषि द्वारा अपनी पत्नियों के साथ संयोग करने से पुरे संसार के सभी जीव-जंतुओ की उत्पत्ति हुयी थी।

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जवाब दिया गया09/16/22

चलिए दोस्तों आज हम आपको बता रहे हैं कि सृष्टि की रचना किस प्रकार से हुई है। बताया जा रहा है कि मत्स्य पुराण ग्रंथों के अनुसार सृष्टि की रचना एक सुनहरे गर्भ मे ब्रह्मा के प्रवेश कर जाने के कारण हुई थी। और इसे हिरण्यगर्भ की संज्ञा के नाम से भी जाना जाता है। और सृष्टि की उत्पत्ति लगभग 4.54 बिलियन वर्ष पूर्व हुई है जिसका अधिकांश भाग 10-20 मिलियन वर्षों के भीतर पूरा हुआ हैं । लेख की तस्वीर

Aanchal Singh
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जवाब दिया गया09/15/22

हमारे मत्स्य पुराण ग्रंथों के अनुसार सृष्टि की रचना सुनहरे गर्भ में ब्रह्मा के प्रवेश कर जाने के कारण हुई है। इसे हिरण्यगर्भ की संज्ञा भी कहा जाता है, किंतु सांख्य दर्शन सृष्टि की उत्पत्ति गुत्थी को पुरुष तथा प्रकृति नामक दो शाश्वत तत्वों के द्वारा सुलझाने का प्रयास किया गया है।इस ग्रह की उत्पत्ति 4.54 बिलियन वर्ष पूर्व हुई है जिसका अधिकांश भाग 10-20 मिलियन वर्षों के भीतर पूरा हुआ हैं ।लेख की तस्वीर

preeti  patel
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जवाब दिया गया03/09/26

संसार की उत्पत्ति एक ऐसा रहस्य है जिसे विज्ञान और धर्म दोनों ने अपने-अपने नजरिए से समझाने की कोशिश की है। आज के समय में इसके दो सबसे प्रमुख आधार माने जाते हैं:

[सृष्टि की उत्पत्ति को दर्शाती एक तस्वीर जिसमें एक तरफ 'बिग बैंग' धमाका और दूसरी तरफ ब्रह्मांडीय ऊर्जा (ॐ) दिखाई दे रही है]

1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण (The Big Bang Theory): आधुनिक विज्ञान के अनुसार, लगभग 13.8 अरब साल पहले पूरा ब्रह्मांड एक बहुत ही छोटे और गर्म बिंदु (Singularity) में सिमटा हुआ था। एक महाविस्फोट (Big Bang) के साथ यह बिंदु तेजी से फैलने लगा। इससे समय, अंतरिक्ष और पदार्थ का जन्म हुआ। धीरे-धीरे गैसों के बादल ठंडे हुए और तारों, ग्रहों व आकाशगंगाओं का निर्माण हुआ।

2. धार्मिक व आध्यात्मिक दृष्टिकोण: हिंदू धर्मग्रंथों (जैसे नासदीय सूक्त) के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में न सत्य था, न असत्य; केवल अंधकार और चेतना थी। भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है, जिन्होंने अपनी संकल्प शक्ति से पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को संयोजित कर इस जगत की रचना की। वहीं, अन्य संस्कृतियों में इसे दैवीय इच्छा का परिणाम माना गया है।

[ब्रह्मांड के विस्तार को दर्शाता एक इन्फोग्राफिक जिसमें छोटे कणों से विशाल आकाशगंगाओं के बनने का सफर दिखाया गया है]

अंततः, चाहे वह विज्ञान का 'कण' हो या अध्यात्म की 'ऊर्जा', दोनों ही मानते हैं कि संसार एक शून्य से अनंत की ओर बढ़ने वाली यात्रा है।

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जवाब दिया गया06/22/21

पृथ्वी की उत्पत्ति -


लगभग 4.6 अरब साल पहले हमारा सौर मंडल गैस और धूल के एक बादल से बना था जो धीरे-धीरे अपने सभी कणों के पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण के तहत संकुचित हो गया था। बादल कुछ हीलियम (He) और शेष प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक तत्वों की थोड़ी मात्रा के साथ बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन (H) से बना था। उससे बड़े तत्वों का उत्पादन सुपरनोवा में किया जाना था।

नेबुला के सिकुड़ने के साथ ही प्रारंभिक घुमाव या टम्बलिंग गति तेज हो गई थी, जैसे एक कताई स्केटर जो तेजी से घूमने के लिए अपनी बाहों में खींचता है। सिकुड़ा हुआ, घूमता हुआ बादल एक डिस्क में चपटा हो गया। डिस्क के भीतर, पदार्थ की सबसे बड़ी सांद्रता केंद्र में थी। यह सूरज बन गया। डिस्क में छोटे गुच्छों में एकत्रित पदार्थ। ये ग्रह बने। प्रोटो-सूर्य और प्रोटो-ग्रह द्रव्यमान के केंद्र की ओर गिरने वाले पदार्थ के बढ़ने से बढ़े। संकुचन के दबाव में वृद्धि के साथ सौर निहारिका गर्म हो गई। जैसे-जैसे प्रोटो-सूर्य बढ़ता गया और दबाव बढ़ता गया, यह गुरुत्वाकर्षण संपीड़न से गर्म होता गया। यह लाल चमकने लगा। प्रोटो-सूर्य की गर्मी ने सौर निहारिका को गर्म किया, विशेष रूप से आंतरिक निहारिका को। अंततः प्रोटो-सूर्य के केंद्र में दबाव और तापमान इतना अधिक हो गया कि हाइड्रोजन नाभिक आपस में जुड़कर हीलियम का निर्माण करते हैं। इस परमाणु प्रतिक्रिया ने भारी मात्रा में ऊर्जा जारी की, जैसा कि आज भी जारी है। सूर्य का जन्म हुआ। टी-टौरी चरण के दौरान, बहुत तेज सौर हवा ने शेष गैस और कणों को आंतरिक सौर मंडल से लगभग 10 मीटर से छोटा कर दिया और केवल ग्रहों और क्षुद्रग्रहों को छोड़ दिया। इस समय तक ग्रहों ने अपने लगभग सभी द्रव्यमान प्राप्त कर लिए थे, लेकिन भारी उल्का बमबारी अगले आधे अरब वर्षों तक जारी रही।



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जवाब दिया गया06/21/23

क्या आपने कभी सोचा है कि संसार की उत्पत्ति कैसे हुई है क्योंकि यह बात इतनी उलझी हुई है कि लोगों को समझ में नहीं आती है कि संसार की उत्पत्ति कैसे हुई होगी चलिए फिर भी हम अपने शास्त्रों के द्वारा पता लगाते हैं कि आखिर संसार की उत्पत्ति कैसे हुई है। धार्मिक पुराणों में तो बताया गया है कि पूरे संसार की रचना भगवान विष्णु जी के द्वारा की गई है लेकिन वेदों में बताया जाता है कि संसार में जितने भी जीव जंतु में उनको ऋषि कश्यप ने बनाया है इसलिए लोगों का मानना है कि संसार की उत्पत्ति ऋषि कश्यप के द्वारा की गई है।

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Krishna Patel
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