दुख ही जीवन की कथा रही क्या कहूं जो नहीं कही इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करें? - letsdiskuss
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Sks Jain

@ teacher student professor | पोस्ट किया | शिक्षा


दुख ही जीवन की कथा रही क्या कहूं जो नहीं कही इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करें?


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| पोस्ट किया


दुख ही जीवन की कथा रही है ये सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की कहावत है इसमें श्रंगार रस पाया जाता है दुख ही जीवन मे कथा रही है सबसे ज्यादा हमारे जीवन मे संघर्ष का बहुत ही महत्व है हमारा जीवन संघर्षो से भरा होता है और संघर्ष के बिना कुछ हासिल नहीं है ज़ब दुख हमारे जीवन मे आता है तब हमें संघर्ष करना ही पड़ता है। और जिसने संघर्ष छोड़ दिया वह अपने जीवन को आगे नहीं बड़ा सकता है और आगे कुछ हासिल नहीं कर पाएगा.।Letsdiskuss


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