दोस्तों दुख ही जीवन की कथा रही क्या कहूं जो नहीं कही इस पंक्ति का आशय स्पष्ट है हम आपको स्पष्ट करेंगे यह पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा रचित है और इस पंक्ति का आशय है कि हमारे जीवन में कष्ट आता ही रहता है हमारा सारा जीवन संघर्ष से भरा होता है यदि हम संघर्ष करते हैं तभी हम अपने जीवन में कुछ हासिल कर पाएंगे यदि हम अपने जीवन में संघर्ष नहीं कर रहे थे हम कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे। ऐसे रसूल खान त्रिपाठी जी ने कहा है कि दुख ही जीवन की कथा रही है।
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