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Entertainment & Lifestyleक्या आपके साथ ट्रेन में कभी मजेदार घटना ...
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Shayraa .

| Updated on January 5, 2022 | entertainment

क्या आपके साथ ट्रेन में कभी मजेदार घटना घटी है?

2 Answers
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@viratkumar3750 | Posted on June 29, 2021

  • मेरी ट्रैन वाली प्रेम कहानी
  • अक्सर सफर के दौरान हमारे साथ बहुत से हसीन लम्हे जुड़ते हैं पर कभी-कभी हमारे साथ कुछ ऐसे मजेदार किस्से भी हो जाते हैं जो हमें उम्र भर याद रहते हैं। कुछ घंटों के सफर में ही हमें ऐसी यादे मिल जाती हैं जिन्हें हम ताउम्र याद रखते हैं। आज मैं आपको बताऊंगा मेरी जिंदगी का एक ऐसा ट्रेन का सफर जो मेरे लिए आज भी बहुत यादगार है।
  • पहले प्यार का एहसास
  • तो मेरे उस यादगार सफर की शुरुआत हुई थी साल 2019 में, जब मै ट्रैन के द्वारा दिल्ली से जयपुर जा रहा था। मैं जयपुर अपने दोस्त से मिलने जा रहा था। जब मैं दिल्ली से रवाना हुआ तो मेरी मां ने मेरे बैग मे कपड़े, खाना और कुछ पैसे रख दिए थे। साथ ही चोरी छुपे मेरी जेब में कुछ चॉकलेट भी रख दी। और फिर मै फटाफट जाकर ट्रेन में बैठ गया। कुछ ही देर में ट्रेन चलने को तैयार थी। मेरे सामने वाली सीट खाली थी। पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया और मैं हेडफोन पर गाने सुनने लग गया। गाने सुनते सुनते मेरी आंख लग गई। और ट्रेन कब चल पड़ी मुझे पता भी नहीं चला। ट्रेन को चले 5:00 ही मिनट हो रहे थे कि मेरे फोन पर किसी का कॉल आया। मैं एकदम से उठा और मैंने कॉल देखा पर कॉल देख कर मुझे बहुत बुरा लगा। क्योंकि वह कॉल कंपनी वालों का था। इस एक फोन कॉल ने मेरी नींद खराब कर दी। इतने में टीटी वहां आ गया और मैंने अपनी टिकट दिखा दी। पर अब मुझे सोने का मन भी नहीं कर रहा था। तभी मैंने एक बात पर गौर किया कि मेरे सामने वाली सीट जो खाली थी उस पर कोई बैठा हुआ था। वह एक लड़की थी। उसने एक सूट पहना हुआ था। मेरी बहुत सी स्टाइलिश कॉलेज फ्रेंड थी इसलिए मैंने उस जैसी कई लड़की देखी थी। तो मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया। और मैं दोबारा गाने सुनने लग गया। और फिर देखते -ही -देखते एक घंटा बीत गया। और मुझे भूख लगने लगी। मैंने मां के द्वारा बनाया गया खाना बैग से निकाल कर बाहर रख दिया। पर मेरे पास पीने के लिए पानी नहीं था। मैने देखा, मेरी बगल वाली सीट पर एक कपल बैठा हुआ था। वह दोनों बहुत सी प्यारी भरी बातें कर रहे थे। और एक दूसरे को प्यार जता रहे थे।
    • मैं उस वक्त 19 साल का था। पर मुझे पुराने गाने सुनने का बहुत शौक था। और मेरे पसंदीदा सिंगर थे किशोर कुमार। उनकी आवाज में मुझे एक अलग सी मिठास लगती थी। उनकी आवाज सुनने के बाद मानो मै मंत्र मुक्त हो जाता था। और मैं हेडफोंस पर भी उन्हीं के सॉन्ग सुन रहा था। तभी मेरे पसंदीदा गीतों में से एक गीत "ओ मेरे दिल के चैन " मेरे फोन से बजा। मैं इस गाने को बहुत इंजॉय कर रहा था। साथ में उस कपल को प्यार करता देख मेरे मन में प्यार भरे भाव आने लगे। तभी मेरा ध्यान मेरे खाने की ओर गया। मेरे सामने यह उलझन थी कि मैं खाना कैसे खाऊं। क्योंकि मेरे पास पीने के लिए पानी नहीं था। तभी वो सूट वाली लड़की मेरे पास आई और उसने मुझे पानी की बोतल दी। और मुझसे कहा " आपको शायद इसकी तलाश थी"। पहले तो मैं उसे देखता ही रह गया। क्योंकि उस वक्त गाने के जो बोल चल रहे थे वो ये थे " यूं तो अकेला ही अक्सर गिर के संभल सकता हूं मैं तुम जो पकड़ लो हाथ मेरा दुनिया बदल सकता हूं मैं "।
    • उस वक्त पहली बार मेरे मन में किसी लड़की के लिए प्यार वाली feeling आयी। और मैंने फिर कहा" हां शायद मुझे इसी चीज की तलाश थी"। मुझे मन ही मन उससे पहली नजर वाला प्यार हो गया। पर पहले तो मैं अपनी feeling को नकारते रहा। पर जब उसने मुझसे मुस्कुराते हुए बोला "अब आप नंदनी को देखते ही रहेंगे या खाना भी खाएंगे "। तब उसकी खूबसूरत आंखों में मुझे मेरे लिए प्यार नजर आने लगा। और मुझे उससे प्यार हो गया। पानी देने के बदले में मैंने उससे बोला थैंक यू।
    • और अब हम दोनों खाना खाने लगे। मुझे ऐसा लगने लगा था कि वह भी मेरे लिए कुछ महसूस कर रही है। खाना खाने के बाद हमने बहुत सी बातें की। बातें करते करते हम बहुत घूल -मिल गए थे। और धीरे-धीरे कुछ घंटे निकल गए। तभी हमारे बगल में बैठे कपल ने हमसे कहा क्या आप बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड है। इसके जवाब में मैंने हंसते हुए कहा पता नहीं। पर उस कपल ने हमसे कहा आप दोनों की आंखों में एक दूसरे के लिए प्यार है। पर नंदिनी ने कहा ऐसा कुछ नहीं है। हम बस दोस्त हैं। नंदनी मुझे अपने बारे में सब बताती रही। और मैं बस उसे देखता ही देखता रहा। उसकी आंखें काफी अच्छी थी। उसके काले लंबे बाल जब हवा चलने पर लहराते थे तो वो काफी खूबसूरत लगती थी। और मेरा दिल करता मैं बस उसे देखता जाऊं देखता जाऊं और देखता ही जाऊं। नंदनी से मिलने के बाद मानो मे उस ट्रेन के सफर में सारी दुनिया को भुला कर बस उसके ही खो गया था। मेरी और दुनिया मानो थम सी गयी थी। और नंदिनी भी जिस तरह शर्माकर मुझे देखती मुझे ऐसा लगता है कि वह भी मुझसे प्यार करने लगी है। हम दोनों बाकी दुनिया भुला कर बस एक दूसरे में डूब गए थे। हमने एक दूसरे से इतनी बातें कर ली थी कि हमें ये पता नहीं चला की time कितना बीत गया। और फिर वो घड़ी आयी जब हमारी ट्रेन जयपुर पहुंच गई। और वो वक्त भी आ गया जब हम दोनों को अपने -अपने रास्ते जाना था। हम दोनों चाहते तो नहीं थे एक दूसरे से दूर होना। इसलिए हमने एक दूसरे को फोन नंबर दिया। और नंदिनी ने मुझसे बोला विराट एक दिन ऐसा जरूर आएगा। जब हम एक दूसरे को मिल जाएंगे। और वह मेरे गले लगी यह मेरी जिंदगी के खूबसूरत एहसासों में से एक था। पर वक्त का ऐसा हसीं सितम था कि हमें अलग होना पड़ा।
    • पर आज भी मैं उनसे बातें करता हूँ और हम अब मिलते भी है।Article image
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@krishnapatel8792 | Posted on January 5, 2022

यह घटना काफी पुरानी है शायद सन 1997 की जब मेरी बेटी की डेढ़ साल की थी तब मेरा पूरा परिवार एक शादी में शामिल होने जा रहे थे तभी सुबह 5:30 बजे की ट्रेन थी हमें रिजर्वेशन सीट नहीं मिली थी तभी हम स्लीपर डिब्बे में गए थे हमारी सीट साइड लोवर की थी और गर्मी का मौसम था। और जब अपनी सीट पर पहुंचे तो इसमें बहुत से लोग शांति पूर्ण सो रही थी तभी हमने जाकर अपनी सीट खाली करवाई लेकिन वे लोग हमारी सीट खाली नहीं कर रहे थे और लड़ाई झगड़ा करने लगे लेकिन वह मेरे बच्चों के लिए केवल मिडिल सीट देने के लिए तैयार थे लेकिन उस मिडिल सीट में मेरी पत्नी और बच्चे सब लोग नहीं डाल पाते और ऐसे में टीआई को ढूंढ़ पाना भी नामुमकिन था गर्मी का मौसम था इसलिए खिड़की से ठंडी ठंडी हवा आ रही थी इसलिए कोई भी सीट खाली करना नहीं चाहता था और मेरे शरीर से पसीना टपक रहा था और यह लोग सोच रहे थे कि मैं उनका अकेला क्या बिगाड़ लूंगा लेकिन वहां पर बल काम नहीं आता बुद्धि से काम लिया जाता है अभी मेरी बेटी तेज तेज से रोने लगी और सभी यात्रियों को जगा दिया तभी सभी लोग उठ कर मेरी मदद की है और मेरी सीट को खाली करवा दिए इस घटना को मैं अपने जीवन में कभी भी नहीं भूल पा रहा हूं Article image

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