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हिन्दू धर्म में 108 अंक का क्या महत्व है ?

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Answered on06/08/22

आइए दोस्तों आज हम हिंदू धर्म में 108 अंक का क्या महत्व होता है ये बता रहे है । 108 अंक को हिंदू धर्म में बहुत महत्व है । क्योंकि हिंदू धर्म में 108 को शिव का अंक माना गया है इसके पीछे की वजह यह है कि 108 शिवांगो की संख्या होती है। हिंदू धर्म में कहा जाता है कि किसी भी भगवान का जाप करना है तो 108 बार ही करना चाहिए ऐसा करने से उसे बहुत शुभ फल प्राप्त मिलता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है इसीलिए रुद्राक्ष की जाप मालाओ में उनकी संख्या 108 होती है.। Article image

Aanchal Singh
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Answered on06/07/22

क्या आप जानते हैं कि हमारे हिंदू धर्म में 108 अंक का क्या महत्व होता है जहां पर हम आपको बताएंगे। हम आपको बता दें कि 108 अंक भगवान शिव का अंक होता है क्योंकि मुख्य शिवांगो की संख्या 108 होती है। और रुद्राक्ष की माला में 108 मनके होते हैं जिनका जाप किया जाता है।हमारे हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि बौद्ध और जैन धर्म में भी 108 अंक का बहुत महत्व है। ईश्वर का नाम भी तभी संपूर्ण होता है जब इसे 108 बार बोला जाता है। बौद्ध धर्म के अनुसार कहा जाता है कि व्यक्ति के मन में कुल मिलाकर 108 प्रकार की भावनाएं उत्पन्न होती है जैसे कि सूंघने, खाने, नफरत, प्यार आदि चीजों को मिलाकर 108 संख्याएं बनती है इसलिए हमारे हिंदू धर्म में 108 संख्या का इतना महत्व है।Article image

Krishna Patel
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Updated on12/24/25

हिन्दू धर्म में 108 अंक का बहुत ही महत्व है | 108 अंक को लेकर कई सारी बातें हैं, जो हमारे धर्म में 108 अंक को महत्वपूर्ण बनाती है | आइये आपको आज बतातें हैं, हिन्दू धर्म में 108 अंक का महत्व -

जाप की माला में 108 मोती के दाने क्यों होते हैं ?

हिन्दू धर्म में किसी भी भगवान के नाम का जाप 108 बार होता है | इसका एक कारण है - हमारे हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य के पास सिर्फ 24 घंटे होते हैं, जिनमें से 12 घंटे वह अपनी रोजाना की दिनचर्या में निकल देता है, और बचे हुए 12 घंटे में वह भगवान की आराधन करता है | 24 घंटे में एक इंसान 21,600 बार सांस लेता है | भगवान की आराधना करने के लिए उसके पास 12 घंटे होते हैं, जिनके आधार पर वह 10,800 बार सांस लेता है | इस 10,800 बार में से पल-पल ली जाने वाली सांस में वह मंत्र का जाप कर सकता है | अब इतने लंम्बे समय तक जाप संभव नहीं इसलिए आखिर के 2 शुन्य हटा दिए गए और 108 बार मन्त्रों का जाप किया जाने लगा |

कुछ विशेष महत्व :-

- वृंदावन में भगवान कृष्णा की 108 गोपियाँ थी |

- आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में 108 मुख्य बिंदु है, जो जीवन शक्ति में ऊर्जा केंद्रित करते हैं |

- हिन्दू धर्म में 108 पुराण और उपनिषद हैं, जिसमें ज्ञान का भंडार है |

- भारतीय नाट्य शाश्त्र में 108 परिवर्तन कर्ण हैं |

- भारत में 108 दिव्या देशम है, जो कि तीर्थ स्थानों का महत्वपूर्ण समूह माने जाते हैं |

- संस्कृत में 54 अक्षर हैं, जिनका पुर्लिंग और स्त्रीलिंग दोनों में अर्थ अलग है | जिसके कारण 54*2 के आधार पर 108 अंक बन जाता है |

- समुद्र मंथन के समय भी 108 लोग ही थे 54 देवगण और 54 राक्षस गण |

यह कुछ विशेष बातें हैं, जिनके आधार पर हिन्दू धर्म में 108 अंक का महत्व अधिक है |

K
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