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Sneha Bhatiya· 6 साल पहले
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ऋषि कपूर की यादगार फिल्में कौन सी हैं?

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जवाब दिया गया03/28/23

ऋषि कपूर की कुछ यादगार फिल्मे -

1.बॉबी -

ऋषि कपूर की बॉबी फ़िल्म 29 सितंबर 1973 क़ो रिलीज हुयी है, यह फ़िल्म काफ़ी सुपरहिट हुयी है,इस फिल्म में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया के अलावा अन्य अभिनेता प्राण, प्रेम चोपड़ा, प्रेमनाथ और दुर्गा खोटे जैसे कलाकार नजर आए थे तथा इस फिल्म के निर्देशन राज कपूर है।

2.हम किसी से कम नहीं -

ऋषि कपूर की यह फ़िल्म 25 अगस्त 1977 को रिलीज की हुयी थी। यह फ़िल्म अपने जमाने में काफ़ी सुपरहिट रही,इस फिल्म में ऋषि कपूर,अभिनेत्री काजल किरण, तारिक, जीनत अमान जैसे कलाकार नज़र आये है। इस फिल्म के निर्देशक नासिर हुसैन है।लेख की तस्वीर

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जवाब दिया गया12/24/22

दोस्तों ऋषि कपूर बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता थे ये एक ऐसे अभिनेता थे इनको जो भी किरदार दिया जाता है वें उस किरदार को बाखूबी निभाते थे आज इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे की ऋषि कपूर की यादगार फ़िल्में कौन सी है। ऋषि कपूर अपने एक्टिंग के लिये जाने जाते थे तभी तो वों आज भी लोगों के दिलों में राज कर रहे है। ऋषि कपूर की पहली फ़िल्म बॉबी है पहली हीं फिल्म में ऋषि कपूर की फिल्म हिट हो गई। और फ़िल्में जैसे अग्निपथ और कपूर एंड संस है जो अपने जमाने की पॉपुलर फ़िल्में थी।

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जवाब दिया गया12/23/22

ऋषि कपूर फिल्म इंडस्ट्री के एक दिग्गज अभिनेताओं में से एक थे। जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक जोकर फिल्म से की थी। ऋषि कपूर 80 90 दशक के सबसे रोमांटिक हीरो में से एक थे। ऋषि कपूर ने अपनी फिल्मी दुनिया में कई सारी सुपर हिट फिल्मों को किया है। जैसे - प्रेम रोग, नसीब अपना अपना, अमर अकबर एंथनी, एक चादर मैली सी, नगीना, कर्ज आदि। ऋषि कपूर ने इन फिल्मों के अलावा भी ऐसी बहुत सारी फिल्में की हैं जिन्हें लोग आज भी याद करते है।लेख की तस्वीर

preeti  patel
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जवाब दिया गया12/23/22

ऋषि कपूर चौकी 80 और 90 दशक के सबसे रोमांटिक और जाने-माने अभिनेताओं में से एक थे आज ऋषि कपूर जी की दूसरी पुण्यतिथि है ऋषि कपूर जी को देश छोड़ के गए हुए 2 वर्ष हो चुके हैं और भगवान से मेरी प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति मिले आज मैं आपको यहां पर ऋषि कपूर जी की यादगार फिल्म कौन सी है इसकी जानकारी दूंगी। ऋषि कपूर जी ने बहुत सी फिल्मों में काम किया है उन की सबसे पहली फिल्म है जो सबसे ज्यादा यादगार है नगीना, अमर अकबर एंथोनी, सागर और बॉबी यह सभी फिल्में ऋषि कपूर जी की यादगार फिल्मी है।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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जवाब दिया गया04/30/20
बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता ऋषि कपूर का 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया.अभी बॉलीवुड, एक्टर इमरान खान की मौत का शोक मना ही रहा था कि उसको एक और झटका ऋषि कपूर के रूप में लग गया. बताया जा रहा है कि वह कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. कैंसर से लड़ाई की जंग में ऋषि कपूर हार गए. और एक बॉलीवुड का पुराना खिलाड़ी क्लीन बोल्ड हो गया.

अभी कल ही यूट्यूब पर द बॉडी फिल्म देख रहा था जिसमें इमरान हाशमी और ऋषि कपूर मुख्य भूमिका में थे.इस फिल्म में ऋषि कपूर की एक्टिंग बहुत ही ज्यादा अच्छी थी. क्योंकि ऋषि कपूर का ऐसा रोल पहले कभी फिल्मों में नहीं देखा था.और जब पता चला कि ऋषि कपूर मर गए तो यकीन ही नहीं हो रहा था..ऐसा लगता है कि ऋषि कपूर की मृत्यु की बात एक फिल्मी कहानी की तरह है मगर सच तो नहीं बदला जा सकता ना..

इस दुनिया में जो आया है वह तो जाकर ही रहेगा कोई कितना भी नाम कमा ले, कितना भी धन कमा लें, कितनी भी जायदाद बना ले, मगर वह सब धरती पर ही रह जाता है यहां तक कि हम इंसान का शरीर भी हमारे साथ नहीं जाता है यहां से जाते वक्त अपने शरीर को भी धरती पर ही छोड़ कर जाना पड़ता है. उसके बाद की दुनिया कैसी होगी कैसे नहीं होगी यह कोई नहीं जानता, किसी धर्म का आत्मा पर विश्वास है और किसी धर्म का आत्मा के नहीं होने पर विश्वास है. इसलिए मरने के बाद स्वर्ग जाना या नर्क जाएगा..यह सब काल्पनिक बातें हैं. अभी की बात तो सिर्फ यही है कि बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर अब इस दुनिया में नहीं रहें.


अपने पिता राज कपूर की 1970 की फिल्म मेरा नाम जोकर में एक बाल कलाकार के रूप में अपनी पहली भूमिका के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. ऋषि कपूर को 1974 में फिल्म बॉबी के साथ फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला, 1973 में डिंपल कपाड़िया के साथ एक वयस्क के रूप में उनकी पहली मुख्य भूमिका थी.


ऋषि कपूर के कुछ ऐसे डायलॉग है जो आज भी बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं.

चांदनी फिल्म तो हर किसी को या दी है इस फिल्म में डायलॉग था ""हम दिल्ली वाले मुल्क के साथ साथ, दिल पे भी हुकूमत करना जानते हैं.... यह डायलॉग बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हुआ था.

मुल्क फिल्म का डायलॉग ""तुम साबित करो मेरा प्यार मेरा मुल्क है वरना मैं बहस हार जाओगे''' आज भी बहुत ज्यादा लोकप्रिय है.

फिल्म फना ""हम आज जो फैसला करते हैं, वही हमारे कल का फैसला करेगा""

फिल्म बोल राधा बोल का यह डायलॉग बहुत ही लोकप्रिय है
""जिस बेटे के सर पर अपनी मां का आशीर्वाद हो उससे तेरे जैसे शैतान तो क्या भगवान भी नहीं मार सकता""


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जवाब दिया गया05/03/20

ऋषि कपूर 80 और 90 के दशक में रोमांटिक भूमिकाओं के लिए बॉलीवुड के जाने-माने व्यक्ति थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने अपने 50 के दशक में भी खुद को नया रूप दिया था। एक अभिनेता का मूल्य उन फिल्मों से तौला जाता है, जिन पर उसने काम किया।


बॉबी (1973):

यह एक वयस्क के रूप में ऋषि कपूर की पहली फिल्म थी और दुनिया अभिनेता के आकर्षण से परिचित हुई। यह फिल्म, जिसने डिंपल कपाड़िया को भी रातोंरात स्टार बना दिया, ने मुख्य जोड़ी के बीच अपार केमिस्ट्री के कारण काम किया। दोनों 1973 में नए चेहरे थे और दोनों अमीर-गरीब विभाजन से लड़ते हुए स्टार-पार प्रेमियों के रूप में सामने आए। यह एक ऐसी फिल्म भी थी जिसमें 16 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ एक वयस्क पुरुष के मुश्किल विषय का सामना किया गया था। जबकि इस फिल्म में इन दिनों लेने वाले नहीं हो सकते हैं, फिर भी इस वर्जित रोमांस की अपील वापस हुई।


सागर (1985):

अभिनेता ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया ने इस सरगर्मी रोमांटिक त्रिकोण में जीवन व्यतीत किया। यह कपूर के सबसे बेहतरीन रोमांसों में से एक था और उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनका पदार्पण एक यादगार था जिसमें कपाड़िया की उनकी राजेश खन्ना के साथ शादी के बाद वापसी हुई। फिल्म इस बात पर भी एक टिप्पणी थी कि यदि प्रेमियों के बीच एक वर्ग विभाजन होता है तो प्यार कैसे पनप सकता है। यदि कपूर, तेजस्वी कपूर, अमीर उद्योगपति की भूमिका निभाते, तो मोना अपेक्षाकृत कम अमीर पृष्ठभूमि से आतीं। माता-पिता का विरोध, सबसे अच्छे दोस्त राजा (कमल हासन) का अप्रतिम प्रेम और प्रमुख जोड़ी के बीच अद्भुत केमिस्ट्री ने इस फिल्म को रॉक बना दिया।


अमर अकबर एंथोनी (1977):

यह कोई रहस्य नहीं था कि कपूर अमिताभ बच्चन के प्रति असभ्य थे, जिन्होंने उस समय बॉलीवुड में राज किया था। विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमि में उठाए गए तीन भाइयों की इस कॉमेडी ने साबित कर दिया कि ऋषि बच्चन और विनोद खन्ना के खिलाफ अपनी पकड़ बना सकते हैं जो उनसे वरिष्ठ थे। ‘अमर अकबर एंथनी’ मजाकिया और अजीब है। तीनों कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री और जबरदस्त कॉमिक गोल्ड था।


नगीना (1986):

यह श्रीदेवी थीं जिन्होंने इस फंतासी श्रृंखला में आकार बदलने वाले साँप की भूमिका निभाई थी, लेकिन ऋषि कपूर ने अपने साथी के रूप में फिल्म को एक बहुत जरूरी वैध टिकट दिया। कितने ही कलाकार एक सुंदर महिला की कहानी सांप में बेच सकते थे, जबकि उसका साथी असहाय है? कपूर ने श्रीदेवी के चरित्र को एक संपूर्ण पेशेवर की तरह पूरक किया।





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