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ब्रिज गुप्ता · 8 साल पहले
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मलमास क्या होता है,और ये कितने साल में आता है ?

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जवाब दिया गया10/26/26

हिंदू धर्म और पंचांग में मलमास का विशेष महत्व माना जाता है। इसे अधिक मास, अधिमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मलमास एक अतिरिक्त चंद्र महीना होता है, जिसे चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए जोड़ा जाता है। इस महीने को धार्मिक दृष्टि से पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

मलमास लगभग हर तीन साल में एक बार आता है। हालांकि, यह ठीक तीन साल के अंतराल पर ही आए, ऐसा जरूरी नहीं है। इसकी गणना हिंदू पंचांग की खगोलीय व्यवस्था के अनुसार की जाती है।

मलमास क्या होता है?

हिंदू पंचांग में महीनों की गणना चंद्रमा और सूर्य की गति के आधार पर की जाती है। चंद्रमा की कलाओं के आधार पर चंद्र महीनों की गणना होती है, जबकि सूर्य की स्थिति ऋतुओं और सौर वर्ष से संबंधित होती है।

एक चंद्र वर्ष में लगभग 354 दिन होते हैं, जबकि एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है। इस प्रकार दोनों वर्षों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। कुछ वर्षों में यह अंतर बढ़कर लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या मलमास कहा जाता है।

पंचांग की गणना में जिस चंद्र महीने के दौरान सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश यानी संक्रांति नहीं होती, वह महीना सामान्यतः अधिक मास कहलाता है। इस व्यवस्था से चंद्र महीनों और सौर ऋतुओं के बीच तालमेल बना रहता है।

मलमास कितने साल में आता है?

मलमास सामान्यतः लगभग हर तीन साल में एक बार आता है। अधिक सटीक रूप से, इसकी पुनरावृत्ति का अंतर लगभग 32 से 33 महीनों के आसपास हो सकता है, हालांकि वास्तविक अंतर पंचांग की गणना पर निर्भर करता है।

उदाहरण के लिए, अधिक मास कभी ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण या किसी अन्य चंद्र महीने के रूप में आ सकता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि मलमास हमेशा एक ही महीने में आता है। इसकी तिथि और महीना प्रत्येक बार अलग हो सकते हैं।

मलमास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास को भगवान विष्णु और पुरुषोत्तम भगवान से जोड़ा जाता है। पौराणिक परंपराओं में इस महीने को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है। इसी कारण इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शुभ होता है। भक्त इस महीने को आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के अवसर के रूप में देखते हैं।

मलमास में क्या करना चाहिए?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में मलमास के दौरान कई कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।

  1. भगवान विष्णु की पूजा: भक्त भगवान विष्णु की आराधना और मंत्र जाप करते हैं।

  2. दान-पुण्य: जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या अन्य उपयोगी वस्तुएँ दान करने की परंपरा है।

  3. धार्मिक ग्रंथों का पाठ: भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ किया जाता है।

  4. व्रत और साधना: कुछ लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार व्रत रखते हैं।

  5. सेवा और परोपकार: जरूरतमंदों की मदद करना और अच्छे कार्य करना भी इस महीने का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

इन कार्यों का महत्व धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपराओं पर आधारित है।

क्या मलमास में शादी और अन्य मांगलिक कार्य किए जाते हैं?

कई हिंदू परंपराओं में मलमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक समारोह आयोजित करने से परहेज किया जाता है। इसके बजाय इस समय को धार्मिक गतिविधियों, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए उपयुक्त माना जाता है।

हालांकि, रीति-रिवाज अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकते हैं। किसी विशेष समारोह की तिथि तय करते समय संबंधित पंचांग और परिवार की धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. मलमास कितने साल में आता है?

मलमास लगभग हर तीन साल में एक बार आता है। इसका सटीक अंतर हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार बदल सकता है।

2. मलमास के दूसरे नाम क्या हैं?

मलमास को अधिक मास, अधिमास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

3. मलमास क्यों आता है?

चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों के वार्षिक अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।

4. मलमास में किस भगवान की पूजा की जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में भगवान विष्णु और पुरुषोत्तम भगवान की पूजा का विशेष महत्व है।

5. क्या मलमास हर बार एक ही महीने में आता है?

नहीं, मलमास अलग-अलग चंद्र महीनों में आ सकता है। इसका निर्धारण पंचांग की खगोलीय गणना से होता है।

निष्कर्ष

मलमास हिंदू पंचांग का एक अतिरिक्त चंद्र महीना है, जिसे चंद्र और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जोड़ा जाता है। यह लगभग हर तीन साल में आता है और इसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, व्रत, दान और परोपकार का विशेष महत्व है। मलमास की सही तिथि और अवधि जानने के लिए संबंधित वर्ष के हिंदू पंचांग को देखना सबसे अच्छा तरीका है।

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Madhav Sharma is a professional astrologer with over 6 years of practice in Vedic astrology. He holds a Jyotish Visharad certification from the Indian Council of Astrological Sciences (ICAS), New Delhi — one of India's most recognised credentials in the field — and has studied under senior practitioners with decades of lineage in classical Vedic traditions. His content covers Vedic astrology, birth chart analysis, planetary transits, kundli matching, horoscope predictions, and the practical application of astrological principles in daily life. His work has been published on platforms including AstroSage, GaneshaSpeaks, and Boldsky Astrology, where he writes for readers seeking guidance grounded in classical astrological texts and consistent interpretive practice. Over six years, Madhav has conducted 2,000+ individual consultations and published 200+ articles on astrology, covering everything from beginner guides to in-depth analyses of rare planetary combinations. He is a practising member of the Indian Astrology Federation and has been a featured voice at astrology conferences and spiritual wellness events across India. Across all his writing, his approach remains consistent — classical knowledge, disciplined interpretation, and content that respects both the tradition of Vedic astrology and the intelligence of the reader.

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अपडेट किया गया06/01/26

आज यहां पर पूछा गया है कि मलमास क्या होता है और यह कितने सालों में आता है। तो चलिए आज हम आपको मलमास के बारे में बताते हैं. मलमास जिसे हम खरमास कहते हैं। इस महीने में हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे कि नामकरण, शादी ब्याह आदि धार्मिक संस्कार नहीं होता है। यह महीना मलिन होने के कारण इस महीने को मलमास महीना कहा जाता है। हमारे हिंदू धर्म में इस महीने को शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए इस महीने में कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। पंचांग में कहा जाता है जब सूर्य बृहस्पति राशि में प्रवेश करता है तभी मलमास शुरू होता है।

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Krishna Patel
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