ऐसी कौन सी चीज है जो भगवद गीता के बारे में जानना चाहिए?
ऐसी बहुत सी भगवद गीता से जुडी रोचक बाते है जिनको जानना हम सब का कर्तव्य होता है।
जिस प्रकार से हर एक धर्म का अपना एक धार्मिक ग्रंथ होता है, उसी तरह से हिंदू धर्म के लोग गीता को धार्मिक ग्रंथ मे एक महत्वपूर्ण स्थान दिया होता है।हिंदू धर्म में भगवद्ग गीता के हर एक पाठ का एक अलग ही महत्व दिया गया है। जो व्यक्ति रोज भगवद गीता का पाठ पढ़ते है उनको भगवद गीता के हर एक पाठ का रहस्य पता होता है,वह लोग भगवद गीता मे जो भी ज्ञान अर्जित करते है वह आपको बताते है तो आपको उनके द्वारा बताई गई बातो का अनुसरण अवश्य करना चाहिए जो भी भगवद गीता मे बताई गई बातो आप अपने जीवन मे अनुसरण करके चलेंगे तो आप हर एक बड़ी से बड़ी कठिन समस्या का सामना कर पाएंगे।
महाभारत ग्रंथ में कुल मिलाकर 18 अध्याय है और 700 श्लोक होते है जो भी व्यक्ति जिसको लोग भगवद्ग गीता के नाम से जानते है। जो भी व्यक्ति 700 श्लोको का अध्ययन कर लेता है मान लीजिये उसको भगवद गीता का पूरा ज्ञान उसने अर्जित कर लिया है, वह अपने जीवन मे आने वाली हर एक समस्या से जूझ सकता है उसको जीवन की किसी लड़ाई कोई नहीं हरा सकता है।
भगवद गीता के रचियता वेदव्यास जी को माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को महाभारत मे कुछ चीज़े बताई की कार्य करो फल की चिंता ना करे उन्होंने सिर्फ अर्जुन को ही नहीं बल्कि हर एक मानव जाति को उन्होंने उनके द्वारा बताई गई बातो हर एक व्यक्ति अनुसरण करे।
धर्म का अर्थ कर्तव्य होता है। श्री कृष्ण कहते है कि हमें पुरे मन से अपने कर्तव्यों को पूरा करते हुए हमें सच्चे मन से कार्य करना चाहिए ये कभी ना सोचे कि हम जिस कार्य को करने जा रहे है उस कार्य को शांत मन से करे। आप एकाग्र मन से कार्य करे आप दुनिया के बारे बिल्कुल ना सोचे तथा ज़ब आप कार्य कर रहे होते है बिल्कुल ना सोचे कि आपको उसका फल केसा मिलेगा सिर्फ आप अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित करे, क्योंकि अच्छे कार्य का फल हमेशा अच्छा ही फल मिलता है।
भगवान श्री कृष्ण कहते है कि इस दुनिया मे बहुत से ऐसे प्राणी भी है जो सोचते है कि हमें सुख मिले। लेकिन सुख ऐसे ही प्राप्त नहीं होता है सुख पाने के लिए लोगो को अपनी नीद, अलास्य सब कुछ त्यागना पड़ता है तभी जाकर वह सुख पता है।
श्री कृष्ण जी का कहना है कि हर एक मानव को अपने धर्म का पालन करते हुए कर्म करना चाहिए। जैसे - छात्र का धर्म है कि वह विद्या ग्रहण करे तथा सैनिक का कर्तव्य है कि वह पुरे देश भर की ईमानदारी पूर्वक रक्षा करे।
श्री कृष्ण कहते है कि जो मनुष्य मेरी भक्ति जैसे करता है मै उसी के अनुसार उसको फल देता हूँ। कुछ भक्त ऐसे भी होते है जो अपने स्वार्थ पूरा करने के लिए प्रसाद चढ़ाने की बोली लगाकर जाते है, और कुछ ऐसे भक्त होते है जो सुख दुःख दोनों मे मेरे चरणों मे आकर सच्चे दिल से बिना कर्म की ईच्छा किये मेरी भक्ति करते है, मै उन्ही लोगो को उनके कर्मो का फल देता हूँ।







