आज जब से उपचुनाव के नतीजे आये हैं तब से इसे बीजेपी की हार बताया जा रहा है। खास कर कैराना में हार बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है लेकिन इस विपक्ष के फटे ढोल का एक सुहाना शोर और है जो बीजेपी के लिए मुंगेरीलाल के हसीन सपने से कहीं कम नही है। बीजेपी इस चुनाव में हार कर भी जीत गई। इसका पहला कारण यह है कि वह चार में से दो लोकसभा सीटें जीत गई। दूसरा कारण हम थोड़ी देर में स्पष्ट करेंगे।
इन उपचुनाव के नतीजों से फिलहाल न किसी राज्य सरकार पर कोई फर्क पड़ेगा न ही केंद्र सरकार पर लेकिन इसके नतीजे को विपक्ष इस साल के अंत मे होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले मानसिक बढ़त के तौर पर देख सकता है। या अति आत्मविश्वास में आकर अपना नुकसान भी कर सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी तक विपक्ष एकजुट है लेकिन जैसे ही बात सीटों के बंटवारे और नेतृत्व की आएगी यह बिखरता नजर आएगा। ऐसे वक्त में यह बढ़त बहुत काम नही देगी। इसके अलावा बीजेपी ने इन चुनावों में न तो किसी बड़े स्टार प्रचारक को उतारा न ही कोई विशेष नाम का एलान हुआ। ऐसे में हार बहुत मायने नही रखती।
अब आपको बता दें कि बीजेपी आज हार कर भी जीत गई ऐसा हम क्यों कर रहे हैं। कैराना सीट की ही बात करें तो बीजेपी ने अकेले अपने बदौलत 389691 वोट हासिल किया जबकि अन्य दलों के गठबंधन को 421144 वोट हासिल हुई। यह कई दलों के समीकरण के बावजूद था। ऐसे में यह माना जा सकता है कि तस्वीर बदलते देर नही लगती और राजनीति में कुछ भी दीर्घकालिक नही होता है। बाकी भविष्य के गर्त में है कि क्या होना है, थोड़ा इंतजार कीजिए।

