खलिश' (Khalish) उर्दू भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ 'टीस', 'कसक', 'चुभन', 'खटक' या मन में लंबे समय तक बनी रहने वाली भावनात्मक पीड़ा होता है। यह शब्द उस एहसास को व्यक्त करता है, जो किसी अधूरी इच्छा, बिछड़ने, पछतावे, असफलता या पुरानी याद के कारण बार-बार मन में उभरता रहता है। यही कारण है कि 'खलिश' का प्रयोग उर्दू शायरी, ग़ज़लों, नज़्मों और हिंदी साहित्य में गहरी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।

'खलिश' का सरल अर्थ
यदि आसान भाषा में समझें, तो 'खलिश' केवल दुख या दर्द नहीं है, बल्कि दिल में रह जाने वाली ऐसी कसक या टीस है जो समय बीतने के बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं होती। यह किसी अधूरे रिश्ते, बिछड़े हुए प्रियजन, छूटे हुए अवसर या किसी गलती के पछतावे से जुड़ी भावनात्मक पीड़ा को दर्शाती है।
उदाहरण के लिए, किसी प्रिय व्यक्ति से बिछड़ने, कोई सपना अधूरा रह जाने या जीवन में किसी महत्वपूर्ण अवसर को खो देने के बाद जो दर्द बार-बार महसूस होता है, उसे 'खलिश' कहा जाता है।
'खलिश' शब्द की उत्पत्ति
'खलिश' शब्द मूल रूप से फ़ारसी (Persian) भाषा से आया है और बाद में उर्दू तथा हिंदी में प्रचलित हो गया। आज इसका प्रयोग साहित्य के अलावा सामान्य बोलचाल में भी मन की कसक, टीस या भावनात्मक दर्द व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
'खलिश' के प्रमुख पर्यायवाची
टीस
कसक
चुभन
मलाल
खटक
बेचैनी
विलोम (Antonyms)
सुकून
संतोष
तृप्ति
वाक्य प्रयोग
उदाहरण 1:
"पुराने दोस्त से बिछड़ने की खलिश आज भी उसके दिल में बाकी है।"
उदाहरण 2:
"समय पर मेहनत न करने की खलिश उसे जीवनभर महसूस होती रही।"
'खलिश' एक नज़र में
बिंदु | जानकारी |
|---|---|
भाषा | उर्दू |
मूल | फ़ारसी (Persian) |
मुख्य अर्थ | टीस, कसक, चुभन, भावनात्मक दर्द |
प्रयोग | उर्दू शायरी, ग़ज़ल, नज़्म, हिंदी साहित्य और सामान्य बोलचाल |
निष्कर्ष
संक्षेप में, 'खलिश' का अर्थ मन में रह जाने वाली ऐसी टीस, कसक या भावनात्मक दर्द से है, जो किसी अधूरी इच्छा, बिछड़ने, पछतावे या पुरानी याद के कारण बार-बार महसूस होता है। यही वजह है कि यह शब्द उर्दू शायरी, ग़ज़लों, नज़्मों और साहित्य में भावनाओं की गहराई व्यक्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। परीक्षा की दृष्टि से याद रखें कि 'खलिश' का सरल अर्थ है—दिल में बनी रहने वाली कसक, टीस या मलाल।
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