सीता जयंती का क्या महत्व है और इसकी पूजन विधि बताओ? - letsdiskuss
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सीता जयंती का क्या महत्व है और इसकी पूजन विधि बताओ?


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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सीता जी का प्रकाट्य हुआ था। इसके उपलक्ष्य में हर वर्ष सीता जयंती या जानकी जयंती मनाया जाता है। इस वर्ष सीता जयंती या जानकी जयंती 16 फरवरी दिन रविवार को है। आज के दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। आज के दिन मां सीता की पूजा अर्चना करने से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियों का अंत होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाराजा जनक जी पुष्य नक्षत्र के मध्याह्न काल में यज्ञ की भूमि तैयार कर रहे थे। उस समय वह हल से भूमि जोत रहे थे, तभी जमीन से सीता जी प्रकट हुई थीं। सीता का एक नाम जानकी भी है, इसलिए सीता जयंती को जानकी जयंती भी कहा जाता है।



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मान्यता के अनुसार इस दिन सीता का जन्म हुआ था| सीता जयंती फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि मनाई जाती है इस दिन सीता जी धरती से प्रकट हुई थी| सीता जयंती को जानकी जयंती भी कहा जाता है, इस साल सीता जयंती 2 मई 2020 को पड़ रही है| इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और जो महिलाएं इस दिन मां सीता की पूजा करती हैं उनके जीवन में कभी कोई समस्या नहीं आती|


Letsdiskuss (इमेज -गूगल)


धार्मिक मान्यता के अनुसार महाराजा जनक जी पुष्य नक्षत्र के मध्याह्न काल में एक यज्ञ की भूमि तैयार कर रहे थे, जिसमें हल जोत रहे थे, तभी सीता जी धरती से प्रगट हुई| महाराज जनक ने उन्हें अपनी पुत्री कहा और इसलिए उन्हें जानकी नाम से जाना जाता है इसलिए सीता जयंती को जानकी जयति भी कहते हैं|


पूजा विधि:


इस दिन सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें और उसके बाद सीता जयंती का व्रत लेने का संकल्प करें| अब पूजा वाली जगह की सफाई करें और पूजा स्थल में माता सीता और श्री राम की प्रतिमा स्थापित करें| पूजा की शुरुआत गणेश जी और अंबिका जी से करें| इसके बाद सीता जी को पीले फूल, कपड़े और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं| अक्षत्, रोली, चंदन, धूप, गंध, मिठाई यह सभी पूजा के समय भगवान पर अर्पित करें|


इसके बाद “श्रीसीता-रामाय नमः या श्री सीतायै नमः” मंत्र का जाप 108 बार करें| अब हवन और आरती करें| सभी को आरती दें और प्रसाद वितरण करें | इस तरह पूजा सम्पन्न करें|


सीता जयंती का महत्व:


सीता जयंती के व्रत करने से विवाह में आने वाली समस्या दूर होती है और जीवनसाथी की उम्र लम्बी होती है| इस व्रत को करने से सारे तीर्थों के दर्शन का लाभ भी मिलता है|



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