हिंदी भाषा हमारी मातृभाषा है इस बात में कोई संदेह नहीं है इसलिए चाहे छोटे बच्चे हो या बड़े सभी को हिंदी पढ़ना अच्छा लगता है हमारे हिंदी साहित्य में बहुत से कवि और लेखको ने कविताएं तथा दोहे लिखे हैं। हिंदी भाषा पढ़ने में सबसे सरल भाषा होती है आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएं कि हिंदी साहित्य का सर्वप्रथम इतिहास ग्रंथ कौन सा है शायद आपको मालूम नहीं होगा तो कोई बात नहीं हम आपको बता देते हैं कि हिंदी साहित्य का सर्वप्रथम इतिहास ग्रंथ का नाम हैइस्तवार द ला लितरेट्यूर एंदुई ए एदुस्तानी नाम है।
हिंदी साहित्य का सर्वप्रथम इतिहास ग्रंथ कौन सा है?
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चलिए जानते हैं कि हिंदी साहित्य के ग्रंथ को किसने लिखा था।जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। जिसको सभी लिखना और पढ़ना पसंद करते हैं। हिंदी साहित्य में अनेकों लेखक और कवि है जो हमारी मातृभाषा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया है। सबसे पहला हिंदी साहित्य प्रथम इतिहास डॉ॰ रूपचंद पारीक के द्वारा गार्सा-द-तासी को लिखा गया था। इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐन्दूई ऐन्दूस्तानी को हिन्दी साहित्य का प्रथम इतिहास मानते हैंं।

दोस्तों आप ने हिंदी साहित्य के इतिहास के बारे में सुना होगा पर क्या आप जानते हैं कि हिंदी साहित्य का इतिहास किस ग्रंथ में लिखा है यदि नहीं जानते तो चलिए हम आपको बताते हैं हिंदी साहित्य का प्रथम इतिहास ग्रंथइस्तवार द ला लितरेत्यूर ऐन्दुई ए ऐन्दुस्तानी है। आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक आचार्य शुक्ल का इतिहास ऐसे ही तथ्याश्रित तथा तर्क सम्मत के रूप में है।

हिंदी साहित्य का सर्वप्रथम इतिहास ग्रंथ हिस्त्वार द ला लितेरेत्यूर हिंदुई ए एंदुस्तानी माना जाता है। यह ग्रंथ Garcin de Tassy द्वारा लिखा गया था।
इसे 19वीं सदी में फ्रेंच भाषा में लिखा गया था, जिसमें हिंदू और हिंदुस्तानी साहित्य का वर्णन मिलता है। यह हिंदी साहित्य के इतिहास को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने का पहला प्रयास था, इसलिए इसे सबसे पहला इतिहास ग्रंथ माना जाता है।
बाद में रामचंद्र शुक्ला ने हिंदी साहित्य का इतिहास लिखकर इसे अधिक विस्तृत और व्यवस्थित रूप दिया।बयह ग्रंथ हिंदी साहित्य के इतिहास अध्ययन की शुरुआत का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।


