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Sumil Yadav· 6 years ago
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फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब क्यों तोड़ दी जाती है ?

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भारत में जब किसी अपराधी को अदालत द्वारा फांसी (Death Penalty) की सजा सुनाई जाती है, तो न्यायाधीश यानी जज द्वारा अपने पेन की निब तोड़ देने की एक बेहद पुरानी और गहरी परंपरा है। यह कोई कानूनी नियम या अनिवार्यता नहीं है, बल्कि एक बेहद संवेदनशील और प्रतीकात्मक प्रथा है।

पेन की निब तोड़ने के पीछे मुख्य भावना यह होती है कि जिस पेन से किसी इंसान की जिंदगी को खत्म करने का आदेश लिखा गया है, उसका इस्तेमाल दोबारा किसी भी दूसरे काम के लिए न किया जा सके। इसे एक तरह से न्याय की गंभीरता और उस फैसले के प्रति सम्मान के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा, इसका एक प्रतीकात्मक अर्थ यह भी होता है कि एक बार जब जज डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर देता है, तो वह खुद भी अपने इस फैसले को वापस या तब्दील नहीं कर सकता; यानी वह न्याय की अंतिम मुहर होती है।

यह पूरी प्रक्रिया यह भी दर्शाती है कि मृत्युदंड का फैसला सुनाना किसी भी न्यायाधीश के लिए भावनात्मक और मानसिक रूप से कितना भारी होता है। निब तोड़कर जज खुद को उस फैसले के भारी बोझ से अलग करता है और यह कामना करता है कि समाज में दोबारा कभी ऐसा जघन्य अपराध न हो जिसके लिए किसी को ऐसी दर्दनाक सजा देनी पड़े।

यहां एक और दिलचस्प विषय है जिसका आप आनंद ले सकते हैं: सूर्योदय से पहले फांसी क्यों दी जाती है,बताइये ?
Answered by
Tara Verma
Tara VermaTen years in the classroom, shaping minds — bringing the same clarity and purpose to every piece she writes about education.
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Tara Verma is a practising teacher and education content writer with over 10 years of classroom experience across primary and secondary levels. She holds a Master's degree in Education (M.Ed.) from Delhi University and a Bachelor of Education (B.Ed.) from Jamia Millia Islamia — qualifications that ground her writing in both pedagogical theory and the day-to-day realities of teaching in India. Her content covers exam preparation strategies, learning methodologies, curriculum guidance, student mental health, career counselling for students, and the evolving state of school and higher education in India. Her work has appeared on platforms including TeacherVision India, Jagran Josh, and Careers360, where she writes for students, parents, and fellow educators who need content built on actual teaching experience — not theory alone. Over a decade of working directly with students across age groups and learning levels has given Tara a practical understanding of how education content should be written — clearly, accessibly, and with genuine awareness of the challenges students and teachers face on the ground. She has taught 1,000+ students, contributed to school curriculum development initiatives, and published 250+ articles on education across digital platforms. She is an active member of the National Council of Teachers of English (NCTE) India. Across all her writing, every recommendation is classroom-tested, every insight comes from direct teaching experience, and every article is held to the same standard she applies in her own classroom — accuracy, clarity, and genuine usefulness for the reader.

Updated on06/05/26
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अक्सर आपने फिल्मों में देखा होगा की जब अपराधी को फांसी की सजा सुनाई जाती है तो अक्सर जज अपने पैन कि निब तोड़ देता है यह केवल फिल्मों में नहीं होता बल्कि असल जिंदगी में भी होता है इसके पीछे का कारण यह है कि यह अपराध फिर से दोबारा ना हो और किसी को फिर से दोबारा ऐसी सजा न देनी पड़े इस आशा से जज अपने पेन की निब को तोड़ देता है। क्योंकि भारत में फांसी एक ऐसी सजा होती है सबसे बड़ी सजा है। और जब अपने पेन की निब तोड़ देता है तो इसका मतलब यह होता है कि अब जज अपना फैसला नहीं बदल सकता है।Article image

Answered by
Krishna Patel
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Answered on01/24/22
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फिल्मों में अक्सर देखा जाता है, जब जज किसी मुजरिम को फांसी की सजा सुनाता है तो उसके बाद वह उस निब को तोड़ देता है । ऐसा सिर्फ फिल्मों में नहीं होता बल्कि ऐसा असल ज़िंदगी में भी होता है । जब भी जज किसी मुज़रिम को फांसी की सजा सुनाता है उसके बाद वह उस पेन की निब तोड़ देता है । इसका सामान्य रीज़न यह कहा जाता है कि उस पेन से अब दोबारा कोई और फैसला नहीं हो सकता और दूसरा कि जिस सजा के लिए मुजरिम को फांसी की सजा मिल रही है ऐसा जुर्म फिर दोबारा न हो । इस आशा के साथ पेन की निब तोड़ दी जाती है, परन्तु इसके लिए यह कहना भी गलत नहीं होगा कि जिस पेन ने किसी की ज़िंदगी का फैसला कर दिया जज उस पेन के जीवन को भी वहीं ख़त्म कर देता है ।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा सिर्फ भारत में ही होता है कि फांसी की सजा के बाद पेन की निब तोड़ दी जाए क्योंकि भारत में फांसी एक ऐसी सजा होती है जो सबसे बड़ी होती है । भारत में किसी बहुत बड़े अपराध के लिए ही फांसी की सजा सुनाई जाती है, और अगर एक बार सुप्रीम कोर्ट के जज ने फांसी की सजा सुनकर पेन तोड़ दिया तो उसके बाद वो खुद भी अपना फैसला नहीं बदल सकते । पेन तोड़ने का जज का मतलब ही इस बात से होता है कि उनके द्वारा किया गया फैसला अब अटल है, उस फैसले को वो खुद भी नहीं बदल सकते इसलिए वह उस पेन को ही तोड़ देते हैं ताकि दोबारा उस अपराध की सजा के फैसले के लिए कोई गुंजाईश न रहे । इसके लिए अपराधी दोबारा कोर्ट में अर्ज़ी नहीं लगा सकते , अगर कोई मुज़रिम फिर भी अर्जी लगाना चाहता है तो वह सीधा देश के राष्ट्रपति के पास अपनी एक याचिका भेज सकता है ।

फांसी का फंदा एक विशेष जगह से ही मंगवाया जाता है,। फांसी का फंदा बिहार के बक्सर जिले के कुछ कैदियों द्वारा बनवाया जाता है, और यह मनिला रस्सी से बनता है । फांसी के वक़्त जल्लाद मुजरिम से गले में फांसी का फंदा डालकर मुजरिम के कान में कहता है कि "मुझे माफ़ कर दो, मैं हुक्म का गुलाम हूँ ,मेरा बस चलता तो मैं आपको जीवन देकर सत्य के मार्ग पर चलाता " ऐसा कह कर जल्लाद मुज़रिम के सिर पर काले रंग का कपड़ा डालकर उसके गले में फांसी का फंदा लगा देता है । इसके बाद जल्लाद अपना काम करता है , जिसके कारण मुज़रिम को फांसी लग जाती है ।

Answered by
Ramesh Kumar
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Updated on05/28/26
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