भारत में जब किसी अपराधी को अदालत द्वारा फांसी (Death Penalty) की सजा सुनाई जाती है, तो न्यायाधीश यानी जज द्वारा अपने पेन की निब तोड़ देने की एक बेहद पुरानी और गहरी परंपरा है। यह कोई कानूनी नियम या अनिवार्यता नहीं है, बल्कि एक बेहद संवेदनशील और प्रतीकात्मक प्रथा है।
पेन की निब तोड़ने के पीछे मुख्य भावना यह होती है कि जिस पेन से किसी इंसान की जिंदगी को खत्म करने का आदेश लिखा गया है, उसका इस्तेमाल दोबारा किसी भी दूसरे काम के लिए न किया जा सके। इसे एक तरह से न्याय की गंभीरता और उस फैसले के प्रति सम्मान के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा, इसका एक प्रतीकात्मक अर्थ यह भी होता है कि एक बार जब जज डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर देता है, तो वह खुद भी अपने इस फैसले को वापस या तब्दील नहीं कर सकता; यानी वह न्याय की अंतिम मुहर होती है।
यह पूरी प्रक्रिया यह भी दर्शाती है कि मृत्युदंड का फैसला सुनाना किसी भी न्यायाधीश के लिए भावनात्मक और मानसिक रूप से कितना भारी होता है। निब तोड़कर जज खुद को उस फैसले के भारी बोझ से अलग करता है और यह कामना करता है कि समाज में दोबारा कभी ऐसा जघन्य अपराध न हो जिसके लिए किसी को ऐसी दर्दनाक सजा देनी पड़े।
यहां एक और दिलचस्प विषय है जिसका आप आनंद ले सकते हैं: सूर्योदय से पहले फांसी क्यों दी जाती है,बताइये ?
