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Updated on Jun 5, 2026education

सुभाष चंद्र बोस जी को नेताजी क्यों कहा जाता है और उनको किसलिए याद किया जाता है ?

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Updated on May 28, 2026

आज़ादी की लड़ाई के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देने वाले महान व्यक्ति सुभाष चंद्र बोस एक सरल स्वाभाव और शांत किस्म के व्यक्ति थे | 23 जनवरी 1897 को बंगाल में जन्में सुभाष चन्द्र बोस बचपन से पढ़ाई में होशियार थे।उन्हें देशभक्तों का देशभक्त कहा जाता था।कट्टक से स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता में दाखिला लिया।

कुछ समय उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने अपने टीचर के साथ भारत विरोधी बातें बोलने के लिए हिंसा की थी| आज़ादी पाने के जुनूनी नेताजी बोस ने एक समय पर सरकारी नौकरी को छोड़कर कांग्रेस से जुड़ गए थे। इस बात से यह सिद्ध था की वह आज़ादी से ज्यादा कुछ नही सोचते थे|करीब-करीब 11 बार कारावास की सजा पाने के बाद भी नेताजी के कदम लड़खड़ाए नहीं और देश की आज़ादी का हिस्सा बने।आज़ादी की लड़ाई में साल 1943 में जापान जाने के बाद बोस ने आईएनए (इंडियन नेशनल आर्मी) की स्थापना की जिसके बाद सेना आज़ाद हिंद फौज के नाम से भी प्रसिद्ध हुई और यहीं बोस को ‘नेताजी’ की उपाधि भी मिली थी | मगर 1944 में आज़ाद हिंद फौज और ब्रिटिश फौज के बीच मणिपुर में जंग हुई,,धीरे-धीरे सुभाष चंद्र बोस ब्रिटिश सरकार के लिए खतरा बनने लगे थे|23 जनवरी 1897 को उनका जन्मदिन उनके जयंती के तौर पर बनाया जाता है यही वजह है सब उन्हें इस दिन याद करते है और श्रद्धापूर्वक नमन करते है।
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Updated on Jun 5, 2026

सुभाष चंद्र बोस को “नेताजी” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में असाधारण नेतृत्व, साहस और संगठन क्षमता दिखाई थी। “नेताजी” एक सम्मानसूचक उपाधि है, जो उन्हें उनके अनुयायियों और आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों ने दी थी। यह नाम उनके प्रति लोगों के गहरे सम्मान और विश्वास को दर्शाता है।

सुभाष चंद्र बोस एक ऐसे नेता थे जो अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ बहुत ही आक्रामक और निर्णायक तरीके से आज़ादी की लड़ाई लड़ना चाहते थे। उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलन से अलग रास्ता अपनाया और यह माना कि स्वतंत्रता केवल मजबूत संघर्ष और सशस्त्र आंदोलन से ही प्राप्त की जा सकती है।

उन्होंने आजाद हिंद फौज (Indian National Army – INA) का गठन किया, जिसका उद्देश्य भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना था। उनका प्रसिद्ध नारा था—“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा।” यह नारा आज भी देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।

सुभाष चंद्र बोस को इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह देश की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने विदेशों में जाकर भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्थन जुटाया और जापान की मदद से आजाद हिंद फौज को मजबूत बनाया। उन्होंने सिंगापुर से “आज़ाद हिंद सरकार” की भी स्थापना की थी, जिसे कई देशों ने मान्यता दी थी।

उनका जीवन साहस, दृढ़ संकल्प और देशभक्ति का प्रतीक है। वे उन नेताओं में से एक थे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अंतिम समय तक भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करते रहे।

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