महाभारत में कृष्ण की नारायणी सेना एक बहुत ही शक्तिशाली और विशेष सेना मानी जाती थी। इस सेना की सबसे अनोखी बात यह थी कि इसमें अत्यंत प्रशिक्षित और वीर योद्धा शामिल थे, जो युद्ध कौशल में निपुण थे।
जब कौरव और पांडव युद्ध के लिए सहायता मांगने आए, तब श्रीकृष्ण ने एक अनोखा विकल्प दिया:
एक तरफ वे स्वयं बिना हथियार के रहेंगे, और दूसरी तरफ उनकी पूरी नारायणी सेना होगी।
अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना, जबकि दुर्योधन ने नारायणी सेना को लिया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि सेना कितनी शक्तिशाली थी, फिर भी पांडवों ने श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन को अधिक महत्वपूर्ण माना। नारायणी सेना की विशेषता उसकी ताकत के साथ-साथ यह भी थी कि वह भगवान कृष्ण से जुड़ी हुई थी, जो उसे और भी खास बनाती थी।
