माँ कालरात्रि के पूजन का महत्व क्या है ? - letsdiskuss
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माँ कालरात्रि के पूजन का महत्व क्या है ?


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नवरात्री का सातवां दिन माँ कालरात्रि के लिए माना जाता है । शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए कालरात्रि का जन्म हुआ । जो माता कालरात्रि का पूजन सच्चे मन से करता है उनके शत्रु उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाते और वो व्यक्ति हमेशा सुख समृद्धि से संपन्न रहता है । कालरात्रि का रूप दिखने में बहुत ही डरावना है । बाल बिखरे हुए और उनका वर्ण अंधकार से भरा हुआ , बड़े-बड़े नेत्र जैसे उनसे बिजली निकल रही हो । उनका क्रोध भरा चेहरा सिर्फ उनके शत्रुओं के लिए है । माता कालरात्रि का पूजन नीले रंग के वस्त्र पहनकर करना बहुत शुभ होता है ।
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पूजा विधि :-

माता कालरात्रि के पूजन से पहले घट का पूजन करना आवश्यक है । इसके बाद उपस्थित सभी देवी-देवताओं का पूजन करना चाहिए और फिर नवग्रह का पूजन । अब माता कालरात्रि का पूजन करें । जब पूजा शुरू करें तो हाथों में फूल लेकर माँ कालरात्रि को प्रणाम करें और इसके बाद पूजा शुरू करें । पूजन के बाद उड़द दाल से बना वडा और दही का भोग लगाना चाहिए है ।

वैसे तो सप्तमी का पूजन और दिनों जैसा ही होता है पर माता का शाम के समय का पूजन विशेष विधान से किया जाता है । इसलिए सप्तमी की रात को ‘सिद्धियों’ की रात भी कहा जाता है । माता कालरात्रि के पूजा के बाद भगवान शिव और ब्रह्मा जी का पूजन अवश्य करना चाहिए । 108 बार "या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:" का जाप जरूर करें ।



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