बिल्कुल बन गया है मज़ाज लोग मज़ाक बना के रख दिए ये गड़बड़ी ऊपर से नहीं है जो लोग निचे के कार्यकर्त्ता है वो बच्चों के भविष्य से खेल रहे हैं कुछ पैसा कमाने के चक्कर में वो बच्चों के और विद्यार्थियों के जीवन को जी मज़ाक बना लिए हैं ।
वर्तमान समय मे क्या प्रतियोगिता परीक्षा एक मजाक बन कर रह गए है ,बताइये ?
जी हाँ बिल्कुल वर्तमान समय मे प्रतियोगिता परीक्षा एक मजाक बन कर रह गया है, क्योंकि आज के समय लोगो के बीच इतना ज्यादा कम्पटीशन हो गया है कि एक -दूसरे क़ो हारने के चक्कर मे बहुत सी परीक्षायों की तैयारी करते है जिसमे उनके अंदर सिर्फ एक ही चीज होती है वह एक -दूसरे क़ो हरा सके,इसलिए वह प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करते है जिस कारण से वर्तमान समय मे प्रतियोगिता परीक्षा एक मजाक बन चुकी है।

आपने बिल्कुल सही कहा वर्तमान समय में परीक्षा प्रतियोगिता एक मजाक बनकर रह गया है मजाक बनकर इसलिए रह गया है क्योंकि आज के समय में लोग परीक्षाओं मैं सफल होने के लिए नहीं बल्कि एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए परीक्षा दे रहे हैं लोगों की सोच इतनी गलत हो चुकी है कि वर्तमान समय में शिक्षा का कोई महत्व नहीं रह गया बस लोग एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए एक से बढ़कर एक तरकीब लगा रहे हैं तथा सोच रहे हैं कि लोगों को नीचा कैसा दिखाया जाए। इसलिए शिक्षा का महत्व धीरे धीरे कम होते जा रहा है।

आज के समय में कई लोग महसूस करते हैं कि प्रतियोगिता परीक्षाओं में बढ़ती बेरोजगारी, paper leaks, corruption, लंबे selection process और limited vacancies की वजह से छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। कई परीक्षाओं के रद्द होने या delays की खबरें भी युवाओं में निराशा पैदा करती हैं।
दूसरी तरफ, लाखों छात्र अभी भी मेहनत करके इन्हीं परीक्षाओं के जरिए अपना career बनाते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह “मजाक” कहना भी सही नहीं माना जाता। समस्या ज्यादा व्यवस्था, पारदर्शिता और अवसरों की कमी को लेकर देखी जाती है। वास्तव में, प्रतियोगिता परीक्षाएँ आज भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन system को ज्यादा fair, fast और reliable बनाने की जरूरत महसूस की जाती है।
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