आज के समय में कई लोग महसूस करते हैं कि प्रतियोगिता परीक्षाओं में बढ़ती बेरोजगारी, paper leaks, corruption, लंबे selection process और limited vacancies की वजह से छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। कई परीक्षाओं के रद्द होने या delays की खबरें भी युवाओं में निराशा पैदा करती हैं।
दूसरी तरफ, लाखों छात्र अभी भी मेहनत करके इन्हीं परीक्षाओं के जरिए अपना career बनाते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह “मजाक” कहना भी सही नहीं माना जाता। समस्या ज्यादा व्यवस्था, पारदर्शिता और अवसरों की कमी को लेकर देखी जाती है। वास्तव में, प्रतियोगिता परीक्षाएँ आज भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन system को ज्यादा fair, fast और reliable बनाने की जरूरत महसूस की जाती है।
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